Barwani News: युवराज गुप्ता, बड़वानी। जिले में एड्स को लेकर लगातार प्रयासों से स्थिति पहले की अपेक्षा बेहतर हुई है। एआरटी सेंटर में अब जांचों का दायरा बढ़ाने के साथ ही प्रत्येक मरीज की स्क्रीनिंग और उसकी देखभाल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि एआरटी सेंटर पर आकर जांच व उपचार पाने वाले तो जिम्मेदार चिकित्सकों की पहुंच में रहते हैं, वहीं सबसे बड़ी चुनौती दूसरे राज्यों में मजदूरी के लिए गए श्रमिकों की देखभाल की रहती है। जिले के दूसरे राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और दक्षिण में कर्नाटक आदि स्थानों पर मजदूरी के लिए जाने वाले श्रमिकों की लोकेशन ट्रेस कर विशेष निगरानी की जा रही है। इसके लिए सामाजिक संगठनों की भी मदद ली जा रही है। दूसरे राज्यों में मजदूरी के लिए गए श्रमिकों में कुछ लोग एचआइवी पीड़ित रहते हैं। उनकी समय-समय पर जांच के साथ ही उन्हें उपचार मुहैया कराना एक बड़ी चुनौती रहता है। इसके लिए अलग से प्रयास किए जा रहे हैं।

जिले में बेहतर हुई है स्थिति

जिले के एड्स नोडल अधिकारी डा. प्रमोद गुप्ता के अनुसार वर्तमान में जिले में इस बीमारी को लेकर फिलहाल स्थिति ठीक है। प्रदेश के अन्य जिलों में यह जिला बेहतर स्थिति में है। एचआइवी से संक्रमित मरीजों को लगातार जागरूक करते हुए उन्हें समुचित उपचार मुहैया कराया जा रहा है। मरीज भी पूरी जागरूकता के साथ अपनी सेहत की देखभाल करें, इसके लिए सारे प्रयास किए जा रहे हैं। इन्हें सारी जांच व दवाई उपलब्ध कराई जा रही है।

श्रमिकों व संवेदनशील लोगों पर विशेष फोकस

डा. गुप्ता के अनुसार श्रमिकों में ज्यादा समस्या आती है। एचआइवी पीड़ितों की ये कमजोरी रहती है कि वो इलाज के बारे में ज्यादा समझते नहीं हैं। श्रमिक लोग महाराष्ट्र और गुजरात जाते हैं। वहां काम के दौरान वे अपने इलाज में लापरवाही कर जाते हैं। ऐसे श्रमिकों की एनजीओ के माध्यम से लोकेशन ट्रेस करना पड़ती है। जब ये श्रमिक मजदूरी कर वापस गांव आते हैं, तब शिविर लगाकर इनकी जांच कर उपचार देना पड़ता है। इन्हें माइग्रेंट आबादी के लोग कहते हैं। इनका एक्सपोजर ज्यादा रहता है। उच्च जोखिम के संवेदनशील लोगों को ढूंढना जरूरी रहता है, समय-समय पर उनकी जांच कराकर ट्रीटमेंट देना पड़ता है। एनजीओ के माध्यम से सतत जागरूक किया जा रहा है। एड्स नियंत्रण के कार्यक्रम जारी रहते हैं। व्यापक प्रचार-प्रसार कर जानकारी दी जाती है। डा. गुप्ता के अनुसार वर्तमान में गर्भवती महिलाओं की भी एचआइवी जांच कराई जा रही है।

मुंबई से जांच करने आते हैं विशेषज्ञ

एआरटी सेंटर के डा. जोसेफ सूल्या के अनुसार एआरटी सेंटर में बाहर के सेंटरों के भी मरीज यहां जांच व उपचार के लिए आ रहे हैं। इनमें धार, आलीराजपुर के मरीज यहां उपचार के लिए आते हैं क्योंकि समीप की अच्छी सुविधा रहती है। इसके अलावा सेंटर पर बीमारी से लड़ने की क्षमता सीडी फोर की जांच कराते हैं। ये यहीं पर जांच होती है। वहीं वायरल लोड की जांच मुंबई से प्रतिमाह यहां आने वाले विशेषज्ञ दल के सदस्य करते हैं। इस जांच में वायरस कितना है, इसकी जांच करते हैं। इसकी जांच आने के बाद आगे का उपचार देते हैं।

अब तक आंकड़ों में ये स्थिति

एआरटी सेंटर के डा. सूल्या के अनुसार अब तक के आंकड़े देखें तो वर्ष 2013 से अब तक करीब दो हजार मरीजों की जांच व उपचार यहां किया जा चुका है। इनमें बाहर के सेंटरों के ही करीब 550 लोग यहां आकर जांच व उपचार पा चुके हैं। हालांकि वर्तमान में मरीजों की संख्या में कमी आई है। इसका मुख्य कारण लोगों में जनजागरूकता है, वहीं एआरटी सेंटर पर विविध सुविधाएं अब और बेहतर दी जा रही हैं।

इनका कहना है

एड्स को लेकर सतर्कता व जागरूकता ही बचाव का मुख्य बिंदु है। वहीं, समानता के अधिकार के साथ ही आमजन को समय-समय पर जागरूक करना जरूरी है।

-डा. नितिन रावत, विशेषज्ञ चिकित्सक व शिक्षाविद

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Posted By: Nai Dunia News Network

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