बड़वानी, ठीकरी। नगर में 768 वर्षों से गाड़े खींचने की परंपरा धुलेंडी पर निभाई गई। खंडेराव महाराज का जयघोष लगाकर होली दहन के अगले दिन गुरुवार को यह आयोजन किया गया।

धुलेंडी पर गाड़ा खिंचाई का अनोखा आयोजन शादी समारोह जैसी संपूर्ण रस्म के साथ किया गया। इसमें प्रदेश भर से हजारों श्रद्धालु गाड़े खिंचाई का अनोखा व चमत्कारिक आयोजन देखने पहुंचे।

आयोजन से 15 दिन पूर्व पत्र लिखकर आयोजन में अपनी भूमिका निभाने वाले मेहमानों को बुलाया जाता है। जो अपनी जिम्मेदारी का पूरी तरह निर्वाह करते आ रहे हैं।

मान्यता है कि जन्मस्थली जैजूरी से खंडेराव महाराज घोड़ों पर सवार होकर नर्मदा स्नान करने आए थे। संध्या सुमिरन कर अपने गंतव्य की ओर जाने से पूर्व रात्रि हो गई थी। घना जंगल व जंगली जानवरों के कारण ठीकरी में यादव परिवार के यहां रात्रि विश्राम किया था। अपनी चमत्कारिक शक्ति दिखाकर गाय के दूध से चाय बनवाई थी और अपने वास्तविक रूप के दर्शन कराए थे।

तभी ग्राम में ताम्रपत्र पर गाड़ा खींचने की पूरी विधि का विवरण लिखा गया था जो आज तक कायम है। इस धार्मिक आयोजन के दौरान दूर-दराज के क्षेत्रों से लोग आकर मिठाइयों व फलों से तुलादान कर मन्नतें पूरी करते हैं।

बड़वानी शहर के नवलपुरा क्षेत्र में गुरुवार शाम गाड़ा खिंचाई का आयोजन हुआ। गाड़ों को एक-दूसरे से बांधकर सजाया गया। महिलाओं ने हल्दी के छापे लगाकर पूजन किया। गाड़ा खींचने वाले बड़वे राकेश यादव को हल्दी लगाई गई।

खंडेराव-खंडेराव के जयघोष के साथ लोग उनको कंधे पर बैठाकर हनुमान मंदिर में लाए। उन्होंने यहां माकड़ी को देखा और उसको घुमाया। बाद में जयघोष के साथ गाड़े खींचे गए। गाड़ा खिंचाई देखने उमड़े भारी जनसमूह के साथ 200 मीटर तक गाड़ों को खींचकर ले गए। समाज के चंद्रशेखर यादव ने बताया कि शहर में 11 वर्षों से यह आयोजन हो रहा है। पिछले वर्ष 13 गाड़े थे, इस वर्ष दो गाड़े बढ़ाये गए। कुल 15 गाड़े खिंचे गए।

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