बड़वानी (नईदुनिया प्रतिनिधि)। प्रदेश के कुछ जिले में अतिवृष्टि से बाढ़ के हालात बन रहे हैं। वहीं निमाड़-अंचल में इस बार अब तक औसत बारिश से भी आंकड़ा काफी पीछे है। बारिश की कमी से मौसम शुष्क होने लगा है। इससे दिन का तापमान 30 डिग्री पहुंच गया है। जनजीवन में उमस-गर्मी महसूस होने लगी है। पिछले एक पखवाड़े में हुई बारिश से खरीफ फसलों को जो राहत मिली थी, अब उनमें फिर संकट छाने लगा है।

इस वर्ष अब तक मानसून कमजोर है। इससे बोवनी एक से डेढ़ माह देरी से हुई। वहीं अब सतत बारिश नहीं होने से बोई फसलों की बढ़वार पर असर पड़ने लगा है। दुरुस्ती काम चलने से क्षेत्र में इंदिरा सागर की नहरें सूखी पड़ी हैं। बारिश की कमी से तालाब-पोखर रीते हैं, तो पहाड़ी झरने-नालों में खामोशी छाई हुई है। बारिश की कमी से खरीफ फसलों में कीट प्रकोप की आशंका बढ़ने लगी है। कृषि विभाग के मौसम विशेषज्ञ रवींद्रसिंह सिकरवार ने बताया कि निमाड़-अंचल में मानसून बना हुआ है लेकिन कमजोर है। पूर्वी-दक्षिणी हवाएं चलने पर ही बारिश होने की संभावना है। वैसे सप्ताहभर में तेज-सतत बारिश के आसार नहीं है। सतत बादल छाए रहने से फसलों कीट का प्रकोप आने की संभावना रहती है। खेतों में ऐसे लक्षण दिखाई देने पर किसानों को चाहिए कि दवाईयों का समय पर छिड़काव करें।

पिछले वर्ष से भी 55 फीसदी कम बारिश

जिले में बीते 24 घंटे के दौरान लगभग पूरा जिला सूखा रहा। इस दौरान सिर्फ निवाली में एक मिमी पानी बरसा। जिले में इस वर्ष एक जून से अब तक औसत 225.5 मिमी बारिश हुई है। वहीं गत वर्ष इस दौरान 410.7 मिमी बारिश हो चुकी थी। वैसे जिले में औसत 747 मिमी बारिश होती है।

अंजड़ को छोड़ सभी विकासखंड पिछड़े (आंकड़े मिमी में)

विकासखंड इस वर्ष गत वर्ष

बड़वानी 148.7 324.0

पाटी 177.0 415.0

अंजड़ 106.3 75.9

ठीकरी 193.3 331.9

राजपुर 162.0 463.0

सेंधवा 318.0 566.0

चाचरिया 303.0 455.0

वरला 219.8 352.0

पानसेमल 326.0 669.2

निवाली 3 01.2 452.2

Posted By: Nai Dunia News Network

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