Naag Diwali 2022: बड़वानी/नागलवाड़ी (नईदुनिया प्रतिनिधि)। नाग दीपावली पर क्षेत्र के नाग मंदिरों में उत्सव मनाया गया। शहर सहित अंचल के मंदिरों में विशेष अभिषेक, पूजन कर महाआरती की गई। वहीं निमाड़ के प्रसिद्ध नागतीर्थ नागलवाड़ी में राजगादी मंदिर में नाग दीपावली पर विशेष आयोजन हुए। 850 वर्ष पुराने इस नागतीर्थ में अलसुबह भगवान का अभिषेक व पूजन कर आकर्षक श्रृंगार किया गया। राजगादी मंदिर से भगवान की आकर्षक शोभायात्रा निकाली गई। फूलों से सुसज्जित रथ पर विराजे भीलटदेव ने नगर भ्रमण कर जनता के हाल जाने। भक्तों ने भीलटदेव के जयघोष लगाए वहीं अन्नकूट में प्रसादी पाई। देर शाम को हजारों दीपमालिकाएं सजाई गई। आकर्षक आतिशबाजी की गई।

नागलवाड़ी में नाग दीपावली पर सोमवार को शिखरधाम एवं राजगादी मंदिर में पूजा-अर्चना कर श्रृंगार किया गया। साल में केवल एक बार होने वाले नगर भ्रमण के आयोजन के तहत राजगादी मंदिर से भगवान की आकर्षक शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा प्रमुख मार्ग से होकर निकली। जगह-जगह भक्तों ने नगर के अधिष्ठाता भगवान भीलटदेव पर पुष्पवर्षा की और जयघोष लगाए। वापस मंदिर पहुंचकर यात्रा का समापन हुआ। इसके बाद महाआरती की गई, वहीं अन्नकूट का आयोजन किया गया।

इस आयोजन में हजारों श्रद्धालु पहुंचे और प्रसादी ग्रहण की। वहीं क्षेत्र के सैकड़ों छोटे-बड़े नाग मंदिरों में भी नाग दीपावली मनाई गई। नागलवाड़ी शिखरधाम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष दिनेश यादव के अनुसार वर्ष के 365 दिन में केवल नाग दीपावली पर ही भगवान को नगर भ्रमण कराया जाता है। पहाड़ी की तलहटी में नागलवाड़ी में स्थित राजगादी मंदिर में अन्नकूट होता है। शिखरधाम के दर्शन पूजन के बाद श्रद्धालु यहां पर अन्नकूट में प्रसादी पाते हैं। हजारों श्रद्धालु इस दिन यहां आते हैं। नाग दीपावली को लेकर भक्तों में खासा उत्साह रहा।

यहां भी हुए आयोजन

शहर में नवलपुरा स्थित प्राचीन नाग मंदिर में भी नाग दीपावली पर विविध आयोजन हुए। सुबह भगवान भीलटदेव का अभिषेक व पूजन कर श्रृंगार किया गया। शाम को दीप मालिकाएं सजाकर महाआरती की गई। महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए, वहीं बंधान रोड स्थित नागेश्वर मंदिर में भी भगवान का मनोहारी श्रृंगार कर नाग दीपावली मनाई गई। यहां भी दीप मालिकाएं सजाई गई।

भंडारे में पाई प्रसादी

ओझर/बालसमुद। बालसमुद में भी नाग मंदिर में नाग दीपावली पर विविध आयोजन हुए। यहां भगवान का पूजन व अभिषेक कर श्रृंगार किया गया। महाआरती के बाद भंडारे में सैकड़ों भक्तों ने प्रसादी पाई, वहीं ओझर में भी मंदिरों में आयोजन हुए।

नाग दीपावली का महत्व

ज्योतिषाचार्य पंडित चेतन उपाध्याय के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि को नाग दीपावली मनाई जाती है। इसी दिन भगवान श्रीराम जानकी का विवाह भी हुआ था। नाग लोक में नाग उत्सव मनाया जाता है और इसी को नाग दीपावली कहते हैं। देव दीपावली के बाद यह आयोजन होता है। पुराणों में इसका उल्लेख है।

मान्यता है कि राजा परीक्षित को तक्षक नाग द्वारा मारने के बाद उसके पौत्र राजा जन्मेजय ने प्रतिकार स्वरूप नागों के संहार के लिए विशेष सर्प यज्ञ कराया था। इस पर नागों की रक्षा के लिए देवता आगे आए। सभी देवताओं के आशीर्वाद के साथ ही भगवान गरुड़ और परीक्षित राजा के पौत्र से रक्षा करने का संकल्प दिलाया गया था। नागों की रक्षा की खुशी में नाग लोक में दीप जलाकर उत्सव मनाया गया था, वहीं महाराष्ट्र के नासिक में त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग में कुशावर्त कुंड है जहां सर्प दोष निवारण का पूजन होता है। यहां हजारों लोग काल सर्प दोष पूजन के लिए आते हैं। इस स्थान पर गरुड़जी नहीं जाते।

वहीं एक दूसरी मान्यता भी है। शिखरधाम भीलटदेव मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित राजेंद्र बाबा के अनुसार करीब 850 साल पहले जब नागलवाड़ी के भीलटदेव युवा अवस्था में थे तो वे बंगाल गए थे। वहां के जादूगरों और तांत्रिकों को अपनी शक्तियों से पराजित किया था। वहां से विजयी होकर लौटने पर यहां शिखरधाम नागतीर्थ में दीपोत्सव मनाया गया था, तब से यह नाग दीपावली मनाई जा रही है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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