बड़वानी। नईदुनिया प्रतिनिधि। Narmada Parikrama सरदार सरोवर परियोजना के चलते नर्मदा का जलस्तर करीब 136 मीटर है। इससे नर्मदा परिक्रमा का परंपरागत मार्ग जलमग्न है। बड़वानी स्थित राजघाट से वर्ष 1994 से नर्मदांचल पंचकोसी पदयात्रा समिति के तत्वावधान में निकल रही राजघाट-कोटेश्वर यात्रा पहली बार बैकवाटर कि नारे से रविवार को शुरू हुई।

श्रद्धालुओं ने बैक वाटर किनारे स्नान और पूजन किया

करीब 1200 श्रद्धालुओं ने बैक वाटर किनारे स्नान और पूजन कर नर्मदा के जयघोष के साथ परिक्रमा शुरू की। पांच दिन में यात्रा बड़वानी व धार जिले के करीब 50 गांवों से गुजरते हुए 75 कि मी का सफर तय करेगी। इसमें बच्चे, बड़े, बूढ़े, युवतियां और महिलाएं शामिल हैं। गुरुवार को नर्मदा परिक्रमा यात्रा का समापन राजघाट मार्ग पर बैक वाटर कि नारे ही होगा।

बेटे को उठाकर पांच साल से हो रहे शामिल

जानकारी के अनुसार मन्नत उतारने के लिए धार जिले के कु क्षी तहसील के पिपलिया निवासी अनिल पाटीदार व पत्नी वंदना पाटीदार पांच साल के बेटे के साथ शामिल हुईं। उन्होंने बताया कि नर्मदा मैया ने उनकी गोद भर दी। बेटे को उठाकर पांच साल से पंचकोसी यात्रा कर रहे हैं।

पोता भी साथ चल रहा

गांव बिलवानी से पांच वर्षीय विवेक मयाराम दादी सूरजबाई के साथ पदयात्रा कर रहा है। सूरजबाई ने बताया कि पोते को दो तरफ हार्निया था। डॉक्टर ने ऑपरेशन में जान को खतरा बताया था। नर्मदा मैया से पोते के ठीक होने की मन्नत मांगी। मां के आशीर्वाद से पोते का सरकारी अस्पताल में ऑपरेशन हुआ और वह मेरे साथ पैदल यात्रा कर रहा है।

Posted By: Hemant Upadhyay

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