बड़वानी। जिले के इतिहास से जुड़े कुछ रोचक तथ्य ऐसे भी हैं, जिनसे वर्तमान में कई लोगों को कम ही मालूम होगा। ऐसा ही एक तथ्य यह है कि बड़वानी में पहला स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त 1947 को न मनाते हुए, 15 अगस्त 1948 को मनाया गया था।

इसका कारण यह है कि बड़वानी रियासत का मध्यभारत प्रांत में विलय 31 मई 1948 को हुआ था। बड़वानी रियासत के तत्कालीन महाराजा राणा देवीसिंहजी ने वर्तमान के झंडा चौक पर पहला ध्वजारोहण कि या था। साथ ही गजट का वाचन भी किया था।

यह जानकारी व उस समय की तस्वीरें नईदुनिया को शोधार्थी मनीष दसौंधी ने उपलब्ध कराई है। उनके पास उस समय का गजट भी उपलब्ध है। मनीष दसौंधी ने बताया कि राणा देवीसिंहजी खुद वास्तुविद व भवन डिजाइनर थे। वे बड़वानी में 11 सुंदर भवन जनता के लिए निर्माण करवाना चाहते थे। लेकि न देश आजाद होने जाने से उनका सपना अधूरा रह गया।

हालांकि उस समय के भवन आज भी बड़वानी की शान हैं और इन्हीं भवनों के चलते बड़वानी को 'निमाड़ का पेरिस" कहा जाता है। उल्लेखनीय है कि महाराज साहब के वंशज आज भी इंदौर के ओल्ड पलासिया स्थित 'बड़वानी प्लाजा" में निवासरत हैं।

मेरी आत्मा बड़वानी की प्रजा के मध्य रहेगी

महाराजा देवीसिंहजी ने अपनी स्वैच्छा से 31 मई 1948 को बड़वानी रियासत का मध्य भारत में विलय करवाया था। 1948 में पहले गणतंत्र दिवस आयोजन में गजट का वाचन करते हुए महाराजा ने बड़वानी की जनता से कहा था कि आपने जैसा व्यवहार मेरे साथ रखा, वैसा आने वाली नई मध्य भारत सरकार के साथ रखना। मैं भले ही शरीर से इंदौर में रहूं, लेकि न मेरी आत्मा बड़वानी की प्रजा के मध्य रहेगी। आपका सुख-दुख मेरा सुख-दुख है। इस रियासत की आमदनी 20 लाख रुपए सालाना थी। एक जुलाई 1948 को बड़वानी रियासत का शासन मध्य भारत संयुक्त राज्य के राजप्रमुख को सौंपा था। तब वीएम जोशी बड़वानी के प्रशासक थे।

Posted By: Hemant Upadhyay

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