युवराज गुप्ता, बड़वानी। मध्य प्रदेश की जीवनदायिनी मां नर्मदा के तट पर रामायण और महाभारतकाल के कई ऐतिहासिक पौराणिक स्थल हैं, वहीं नर्मदा के तट पर बसे डूब क्षेत्र के गांव जांगरवा के समीप बीच नर्मदा में रामायणकालीन शिव मंदिर विराजमान है। यह मंदिर वर्तमान में नर्मदा के बैकवाटर में समा गया है। पानी उतरने के बाद मंदिर फिर दिखाई देगा। ग्रीष्मकाल में मंदिर में पूजन होता है। किंवदंती है कि इस मंदिर में लंकाधिपति रावण और उसके पुत्र मेघनाथ ने शिवजी का पूजन व तप किया था।

यांत्रिक-मांत्रिक पूजा के जानकार वयोवृद्ध पुरोहित पंडित नारायणराव दासोंधी के अनुसार नर्मदा के तट अपने आप में अनेक विरासतें सहेजे हुए है। ऐसी किंवदंती है कि यहां मां नर्मदा के किनारे रामायण काल में आकाश मार्ग से जाते समय रावण के पुत्र मेघनाथ ने यहां रुककर शिवलिंग की स्थापना की थी। दक्षिण की शैली में बने मंदिर में भगवान शिव का पूजन रावण ने भी किया था। रावण और मेघनाथ ने नर्मदा के मध्य में शिव पूजन के साथ ही तपस्या भी की थी। इसका उल्लेख नर्मदा पुराण सहित अन्य ग्रंथों में भी है।

नर्मदा किनारे रावण को माहिष्मति सम्राट सहस्त्रार्जुन ने बनाया था बंदी

खरगोन जिले की धार्मिक पर्यटन नगरी महेश्वर में भी कई पौराणिक स्थल विद्यमान हैं। साहित्यकार पंडित हरीश दुबे के अनुसार महेश्वर एक रणमीय स्थल है। यहां पर्यटन स्थल सहस्त्रधारा के संदर्भ में पौराणिक कथा है। शिवभक्त रावण जब शिव की नगरी महेश्वर में आए तो नर्मदा स्नान करते हुए शिवपूजन के फूल किनारे पर रखे थे। इस दौरान माहिष्मति सम्राट सहत्रार्जुन भी स्नान कर रहे थे। उस समय स्नान के पानी से फूल बह गए। इसके बाद रावण और सम्राट सहस्त्रार्जुन में द्वंद हुआ। इसमें रावण पराजित हुआ। इसके बाद सम्राट सहस्त्रार्जुन ने रावण को नर्मदा किनारे छह माह तक बंदी बनाकर रखा था। रावण के नाना ने सम्राट सहस्त्रार्जुन से निवेदन किया, तब उन्होंने रावण को छोड़ दिया। आज भी यह पौराणिक स्थल रावणेश्वर के नाम से जाना जाता है। इसका उल्लेख पद्मपुराण में भी है।

उपेक्षित हैं ये स्थान, संरक्षण और सुंदरीकरण जरूरी

इतिहास के जानकारों और प्रबुद्धजनों के अनुसार रामायणकाल के ये महत्वपूर्ण स्थान वर्तमान में उपेक्षित हैं। इनका संरक्षण और सुंदरीकरण जरूरी है। इन्हें संरक्षित किया जाए तो यहां आने वाले पर्यटक इन स्थानों से भी रूबरू हो सकेंगे।

करेंगे संरक्षण

नर्मदा किनारे निमाड़ में जो भी पौराणिक व ऐतिहासिक स्थल हैं, उनका दौरा कर वहां की स्थिति का जायजा लेंगे। ऐसे महत्वपूर्ण स्थलों का संरक्षण करेंगे। इनके संरक्षण व सुंदरीकरण को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग और शासन प्रशासन को पत्र भेजेंगे। - डा. सुमेरसिंह सोलंकी, राज्यसभा सदस्य, केंद्रीय पुरातत्व सलाहकार बोर्ड के सदस्य

Posted By: Nai Dunia News Network

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