युवराज गुप्ता, बड़वानी। निमाड़ में सफेद सोने के नाम से मशहूर कपास की फसल ने विदेश में भी धाक जमाई है। निमाड़ के चार जिलों खरगोन, बड़वानी, खंडवा और बुरहानपुर में इसका अच्छा उत्पादन होता है। मध्य प्रदेश में हर साल करीब 20 लाख गठान रुई का उत्पादन होता है। निमाड़ के चार जिलों में सर्वाधिक कपास उत्पादन खरगोन जिले में होता है। इसका रकबा करीब दो लाख हेक्टेयर क्षेत्र में है। उद्योगपतियों के अनुसार वर्ष 2022-23 में करीब छह लाख गठान का उत्पादन होने की संभावना है।

निमाड़ क्षेत्र में कपास का रकबा करीब 3.50 लाख हेक्टेयर में है। इसकी खेती से करीब तीन लाख किसान जुड़े हुए हैं। यहां का कपास देश के कई राज्यों के अलावा चीन, वियतनाम, बांग्लादेश, पाकिस्तान आदि देशों को निर्यात होता है। वर्तमान परिस्थिति में पाकिस्तान में निर्यात बंद है। एमपी फेडरेशन चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रदेश उपाध्यक्ष कैलाश अग्रवाल के अनुसार प्रदेश में कपास के कुल उत्पादन में निमाड़ की 50 प्रतिशत भागीदारी है। काटन मिलों से हजारों लोगों को रोजगार भी मिल रहा है।

अंजड़ के उद्योगपति शेखरचंद पाटनी के अनुसार निमाड़ का कपास बेहतर गुणवत्ता का रहता है, इसलिए इसकी पूछपरख अधिक रहती है। सेंधवा के उद्योगपति गोवर्धन तायल के अनुसार कपास एवं कपड़ा उद्योग निमाड़ की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, इसलिए यह यहां के कारोबार में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यहां का कपास देश-विदेश में पसंद किया जाता है। कपास उत्पादन के लिए निमाड़ की जलवायु काफी अनुकूल है। उपजाऊ काली मिट्टी में इसकी बेहतर खेती होती है। यह फसल काली मिट्टी में पोषित होती है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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