Vat Savitri Vrat 2021: बड़वानी। जिले में नर्मदा के सुरम्य तट पर बसे ग्राम ब्राह्मणगांव का उल्लेख नर्मदा पुराण में ब्रह्मवर्त क्षेत्र के रूप में मिलता है। पौराणिक मान्यता है कि यहां गुप्त रूप में ब्रह्माजी ने शिव जी की तपस्या की थी। इसलिए इस क्षेत्र का नाम ब्रह्मवर्त पड़ा। जो अपभ्रंश में ब्राह्मणगांव हो गया। ग्राम में नर्मदा तट पर करीब 300 वर्ष पुराना बरगद वटवृक्ष स्थित है। गुरुवार को वटसावित्री व्रत पर महिलाएं इस वटवृक्ष का पूजन करेंगी।

ब्राह्मणगांव के निवासी पंडित सुभाषचंद्र गीते ने बताया कि ग्राम में प्राचीन गुप्तेश्वर, शुकेश्वर व पृथेश्वर मंदिर आज भी नर्मदा किनारे स्थित है। वहीं शुकेश्वर मंदिर और नर्मदा घाट के मार्ग में स्थित एक वटवृक्ष जो नर्मदा से लगभग 100 फीट ऊंचाई पर स्थित है।

यह वृक्ष लगभग 300 वर्ष पुराना बताया जाता है और इसकी जड़ें नर्मदा तक जाती हैं। ग्राम के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति 97 वर्षीय दशरथ राठौड़ ने बताया कि इस वृक्ष को हमने बचपन से बड़े वृक्ष के रूप में देखा है। इसकी लताएं बड़ी-बड़ी थीं और हम बचपन से इस पर झूलते आए हैं।

बरगद की छाया में कई प्राणी तपती दुपहरी में विश्राम पाते हैं। आज भी गांव में विवाह आदि शुभमुहूर्त में इसी वृक्ष के नीचे की मिट्टी लाकर मुहूर्त किया जाता है। वहीं गांव की महिलाएं इसी वट-वृक्ष के नीचे वटसावित्री व्रत का पूजन करती हैं। साथ ही नर्मदा किनारे अन्तिम संस्कार के लिए आने वाले लोग यहीं बैठकर सुस्ताते भी हैं।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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