नहीं मिलेगी राहत : किसानों का सरकार ने नहीं किया पंजीयन, समर्थन मूल्य की खरीदी न होने से मंडी में लुढ़के मक्का के दाम

- कृषि विभाग ने सोयाबीन के बजाय मक्का की बुवाई करने के लिए किया था प्रोत्साहित

फोटो------18 बीईई 8 :बैतूल। मक्का की उपज।

बैतूल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। लगातार प्राकृतिक आपदा का शिकार हो रहे किसानों को राहत पहुंचाने से इस बार सरकार ने भी हाथ पीछे कर लिए हैं। खरीफ सीजन में किसानों को मक्का की बुवाई करने के लिए प्रोत्साहित करने के कारण ढाई लाख हेक्टेयर में बोई गई फसल की अब समर्थन मूल्य पर खरीदी तक सरकार नहीं कर रही है। समर्थन मूल्य पर खरीदी होने की उम्मीद लगाए बैठे किसानों को अब निराशा हाथ लग रही है क्योंकि मोटा अनाज जिसमें धान, बाजार जैसी फसलें शामिल हैं उनकी समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए पंजीयन का अंतिम अवसर समाप्त हो चुका है। ऐसे में अब मक्का की उपज सरकार समर्थन मूल्य पर खरीदेगी इसकी संभावना बेहद कम हो गई है। समर्थन मूल्य पर खरीदी न होने के कारण कृषि उपज मंडी में मक्का के दाम 800 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गए हैं। कृषक मनीष देशमुख ने बताया कि सरकार ने मक्का का समर्थन मूल्य 1850 रुपये प्रति क्विंटल तो घोषित कर दिया है लेकिन खरीदी नहीं की जा रही है। इसका नतीजा यह है कि मक्का की बुवाई कर किसान पछता रहे हैं। इस बार बारिश अधिक होने से मक्का की फसल को खासा नुकसान पहुंचा है और लागत भी अधिक लग रही है। किसानों को उम्मीद थी कि सरकार या तो मुआवजा देकर नुकसान की भरपाई कर देगी या फिर समर्थन मूल्य पर खरीदी हो जाएगी तो उचित दाम से किसानों को कुछ राहत मिल सकेगी। सरकार ने वायदा खिलाफी तो की ही है साथ ही नुकसान की भरपाई भी नहीं कर रही है। किसान कांग्रेस के जिलाध्यक्ष रमेश गायकवाड़ ने आरोप लगाया है कि प्रदेश सरकार ने किसानों को मक्का की फसल की बुवाई करने के लिए खूब प्रोत्साहित किया था और खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए ढिंढोरा भी पीटा है। किसान इस झांसे में आ गए और बड़े पैमाने पर सोयाबीन के स्थान पर मक्का की बुवाई अपने खेतों में कर डाली। बारिश से पैदावार कम होने की भरपाई समर्थन मूल्य पर खरीदी से हो जाने की उम्मीद किसानों को थी परंतु अब सरकार ने हाथ पीछे कर लिए हैं। इधर इस संबंध में मंडी सचिव एसडी वर्मा का कहना है कि शासन स्तर से मक्का की खरीदी के संबंध में कोई निर्देश नहीं मिले हैं।

नमी का हवाला दे रहे व्यापारीः

कृषि उपज मंडी बडोरा में मक्का की उपज लेकर पहुंच रहे किसानों को बेहद कम दाम मिल रहे हैं। व्यापारियों के द्वारा उपज में नमी होने का हवाला देकर बेहद कम दाम की बोली लगाई जा रही है। ग्राम उमनबेहरा के किसान पंकज चौधरी ने बताया कि सितंबर माह में मक्का के दाम 1 हजार रुपये से अधिक चल रहे थे लेकिन पिछले एक सप्ताह से तो 800 रुपये की न्यूनतम बोली व्यापारियों के द्वारा लगाई जा रही है। किसान मनोज महाजन ने बताया कि अब तो मक्का की उपज पूरी तरह से सूख चुकी है और दानों में नमी नाममात्र की है उसके बाद भी दाम नहीं बढ़ रहे हैं। कृषि उपज मंडी बडोरा में 24 सितंबर को मक्का की खरीदी 1011 रुपये प्रति क्विंटल की न्यूनतम दर से की गई थी। इसके बाद 7 अक्टूबर को दाम 1020 रुपये, 8 अक्टूबर को 738 रुपये, 9 अक्टूबर को 891 रुपये, 12 अक्टूबर को 860 रुपये, 13 अक्टूबर को 801 रुपये, 15 अक्टूबर को 826 रुपये, 16 अक्टूबर को 841 रुपये और 17 अक्टूबर को 830 रुपये प्रति क्विंटल रहे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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