सारणी। रविवार की सुबह सतपुड़ा डेम घाट पर सफाई के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा। श्रमदानियों ने दो घण्टे तक श्रमदान कर तकरीबन 30 ट्रॉली जलीय खरपतवार डेम से बाहर निकाला। तीन सप्ताह के प्रयास से जलाशय की सूरत अब बदलने लगी है। सांझा प्रयास से श्रमदानी कार्यकर्ताओं की मेहनत भी रंग लाने लगी है। गौरतलब है कि तीन सप्ताह पहले तक किसी मैदान की तरह दिखने वाले सतपुड़ा जलाशय के एक बड़े हिस्से में अब पानी दिखाई देने लगा है। दरअसल, सतपुड़ा डेम 65 लाख वर्ग मीटर में फैला है। इसमें जलकुंभी (चाइनीज झालर) फैल गई है। इससे जलाशय पूरी तरह ढंकते जा रहा हैं। इसे देखते हुए स्थानीय लोगों ने इस डेम की साफ-सफाई को लेकर सतपुड़ा पावर प्लांट के अधिकारियों से गुहार लगाई थी। लेकिन जब इस पर कोई सुनवाई नहीं हुई तो संगठनों ने एकजुट होकर इस डेम की सफाई बीड़ा उठा लिया। इसे सतपुड़ा जलाशय स्वच्छता अभियान का नाम दिया। सतपुड़ा जलाशय स्वच्छता अभियान के तीसरे सप्ताह तकरीबन तीन सौ कार्यकर्ताओं ने अपना पसीना बहाया। बैतूल रानीपुर घोड़ाडोंगरी सहित पूरे जिले भर से सैकड़ो की तादाद में गायत्री परिवार के कार्यकर्ता रविवार की सुबह सारणी छठ घाट पर जुटे और श्रमदान में हिस्सा लिया। गायत्री परिवार के कार्यकर्ताओं में बड़ी संख्या महिलाओं की थी। सभी श्रमदानियों ने दो घण्टे तक श्रमदान किया और तकरीबन 30 ट्रॉली जलीय खरपतवार डेम से बाहर निकाला। जिले के पर्यावरणविद मोहन नागर के आह्वान पर पिछले 21 फरवरी से सतपुड़ा जलाशय स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। जलीय खरपतवार से ढंक चुके सतपुड़ा जलाशय को स्वच्छ बनाने के लिए कई संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता बढ़ चढ़कर इस अभियान में हिस्सा ले रहे हैं। अभियान के तीसरे चरण में गायत्री परिवार,मछुआरा समाज, नपा सफाई मजदूर संघ सहित सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ताओं ने श्रमदान किया और काफी मात्रा में खरपतवार जलाशय से बाहर निकालने में अपना योगदान दिया।

प्रतिदिन चलेगा अभियानः

सतपुड़ा जलाशय स्वच्छता अभियान अब सोमवार से प्रतिदिन चलेगा। अभी तक यह अभियान सप्ताह में एक दिन चलता था। इस अभियान के प्रमुख मोहन नागर ने बताया कि साप्ताहिक रूप से चलने वाला यह अभियान सोमवार से प्रतिदिन संचालित होगा। मछुआरा समिति के 25 कार्यकर्ता प्रतिदिन सफाई अभियान चलाएंगे। प्रतिदिन श्रम करने वाले कार्यकर्ताओं को पारिश्रमिक की व्यवस्था जन सहयोग से की जाएगी। पहले की तरह प्रति रविवार को सामूहिक श्रमदान होगा जिसमें सभी सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता एवं आम नागरिकों की सहभगिता होगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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