बैतूल। नवदुनिया प्रतिनिधि

जिले में इस बार करीब दो लाख हेक्टेयर रकबे में किसानों के द्वारा मक्का की फसल बोई गई है। पहले मानसून के रूठ जाने से फसल को जिंदा रखने की मशक्कत करने वाले किसान अब फाल आर्मी वर्म कीट का प्रकोप तेज हो जाने से हैरान-परेशान हो रहे हैं। पिछले वर्ष बड़े पैमाने पर मक्का की फसल को चट करने वाले फाल आर्मी वर्म कीट का प्रकोप पहले तो वन क्षेत्रों से सटे गांवों में ही फसल पर नजर आ रहा था। अब अधिकांश क्षेत्रों में किसानों के द्वारा इसका प्रकोप प्रारंभ हो जाने की जानकारी दी जा रही है। बैतूलबाजार के किसान रमेश धुर्वे ने बताया कि चिखलिया क्षेत्र में स्थित उनके खेत में मक्का की फसल बोई है। एक सप्ताह पहले तक पौधे पूरी तरह से स्वस्थ नजर आ रहे थे। शनिवार को जब खेत में जाकर देखा तो अधिकांश पौधों की पत्तियां फाल आर्मी वर्म कीट ने चट कर दी हैं। पौधे के भीतर मौजूद इल्ली इतनी तेजी से बढ़ रही है कि लगभग हर पौधे को अपनी चपेट में ले लिया है। कृषक अस्सू चौधरी ने बताया कि फाल आर्मी वर्म कीट का प्रकोप हनोतिया में स्थित उनके खेत में भी दिख रहा है। पिछले साल भी प्रकोप प्रारंभ होने पर कीटनाशक दवा का छिड़काव कर दिया था जिससे फसल पूरी तरह से बर्बाद होने से बच गई थी। इस बार प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है लेकिन रिमझिम बारिश के लगातार जारी रहने से कीटनाशक का छिड़काव नहीं कर पा रहे हैं। लगातार बारिश से खेतों में मिट्टी दलदली हो गई है जिससे पैदल चल पाना भी बेहद मुश्किल हो रहा है। ऐसे में दवा का छिड़काव किसान नहीं कर पा रहे हैं।

सूख जाएगा पौधाः फाल आर्मी वर्म कीट मक्का की फसल में पत्तियों का खाने के बाद तने में प्रवेश कर जाता है। तने को पूरा खा लेने के कारण धीरे-धीरे पौधा सूखने लगता है। यदि समय रहते इसका नियंत्रण नहीं किया जाता है तो कुछ ही दिनों में खेत में एक भी पौधा सुरक्षित नहीं बच पाता है। इस कीट का नियंत्रण करने के लिए दवाएं भी बेहद मंहगी होने से कई किसान उपयोग ही नहीं कर पाते हैं। पिछले वर्ष भी मक्का की फसल पर कीट प्रकोप होने के बाद किसानों ने अनुदान पर दवा मुहैया कराने की मांग की थी।

कृषि विज्ञानी दे रहे नियंत्रण की सलाहः कृषि विज्ञान केंद बैतूल के पौध संरक्षण विज्ञानी आरडी बारपेटे एवं केंद्र के प्रमुख डॉ. व्हीके वर्मा ने किसानों को फाल आर्मी वर्म कीट के प्रति सजग रहने का अनुरोध किया है। कीट का प्रकोप 15-20 दिन की फसल से होता है एवं लगभग एक माह में यह कीट फसल को गंभीर क्षति पहुंचाता है। मोटी भूरे रंग की इल्ली जिसका सिर लाल रंग का होता है वह बहुभक्षीय कीट पत्तियों में छिद्र करके तने के अंदर प्रवेश करता है और पूरा पौधा समाप्त कर दिया जाता है। इसकी रोकथाम के लिए किसानों को प्रकाश प्रपंच एवं फेरामोने प्रपंच लगाने के साथ ही 15 से 25 दिन की फसल में पौधों के तने की नली में चार से पांच ग्राम रेत, राख, या लकडी का बुरादा का भुरकाव करना चाहिए। कीट प्रकोप अधिक होने पर रासायनिक कीटनाशक के रूप में फ्लूबेंडामाइ डब्ल्यू डीजी 250 ग्राम प्रति हेक्टर या स्पाइनोसेड 45 एस सी. 200-250 ग्राम प्रति हेक्टर छिड़काव किया जाना चाहिए। इथीफेनप्रॉक्स 10 ईसी एक लीटर प्रति हेक्टर या एमामेक्टिन बेंजोएट 5 एस.जी. का 200 ग्राम प्रति हेक्टर में 15-20 दिन के अंतराल पर दो बार छिड़काव करे प्रकोप रोका जा सकता है।

मूंग की खरीदी के लिए पोर्टल शुरूः

लगभग 12 दिन से पोर्टल बंद होने से समर्थन मूल्य पर मूंग की खरीदी नहीं हो पा रही थी। शनिवार को पोर्टल शुरू होने के बाद किसानों ने राहत की सांस ली है। खरीदी की अंतिम तिथि 31 जुलाई थी, लेकिन कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी खरीदी की तिथि बढ़ाने के अभी तक लिखित आदेश तो नहीं आए, लेकिन खरीदी जारी रहेगी। उप संचालक कृषि केपी भगत ने बताया कि ऑनलाईन पोर्टल शुरू हो गया है और खरीदी भी प्रारंभ हो गई। उपज खरीदी की अंतिम तिथि 31 तारीख थी। शासन की तरफ से लिखित आदेश तो नहीं आए है, लेकिन खरीदी जारी रहेगी। आज या फिर कल तक अंतिम तिथि को लेकर आदेश जारी हो जाएंगे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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