बैतूल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। जिले में तय समय पर मानसून की दस्तक होने से ऐसा लग रहा था कि इस बार सामान्य से भी अधिक वर्षा होगी लेकिन पिछले 10 दिन से कुछ क्षेत्रों को छोड़कर अन्य जगहों पर वर्षा ही नही हुई है। फसलों की बुवाई करने के बाद किसान खेतों में नमी गायब हो जाने के कारण बेहद चिंतित हो रहे हैं। असिंचित क्षेत्रों में तो मक्का और धान की बुवाई करने वाले किसान शत प्रतिशत अंकुरण न होने के कारण दोबारा बुवाई करने की चिंता में पड़ गए हैं। भू-अभिलेख कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार जिले में इस सीजन में अब तक 113.9 मिमी वर्षा दर्ज की गई है जबकि गत वर्ष इस अवधि में दो गुना 227.4 मिमी वर्षा दर्ज की जा चुकी थी। सोमवार को भी जिले के आमला, बोरदेही और बैतूल के आसपास के कुछ क्षेत्रों में तेज वर्षा हुई थी। इसके अलावा जिले के अन्य क्षेत्रों में 10 दिन से वर्षा का इंतजार किसान कर रहे हैं। हर दिन आसमान पर काले बादलों का जमावड़ा होता है और कहीं-कहीं पर हल्की बूंदा-बांदी भी होती है लेकिन तेज वर्षा न होने से फसलों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। किसान पप्पू पटेल ने बताया कि सोयाबीन की बुवाई उन्होंने इस बार कतार में की है। इससे अधिक वर्षा होने पर भी पौधों की जड़ें गल नहीं पाती हैं। फसल के बीज का अंकुरण तो हो गया है लेकिन अब जमीन में नमी खत्म होने से दरार आने लगी हैं। ऐसे में पौधों की बढ़वार तो रुक ही गई है वहीं जल्द वर्षा नही हुई तो पौधे मुरझाने लगेंगे। ग्राम ठेसका के रमेश धुर्वे ने बताया कि अधिकांश किसानों ने मक्का का बीज खेतों में बो दिया है। बुवाई के बाद वर्षा न होने के कारण अंकुरण बेहद कम हो पा रहा है। कुछ प्रतिशत बीज तो नमी में फूल गया था लेकिन वर्षा न होने से अब वह फिर से सूखने लगा है। यही हालत कुछ दिन रही तो 30 से 40 प्रतिशत तक ही बीज उगेगा। कई किसानों के द्वारा तो कुएं और नलकूप के माध्यम से फसलों की सिंचाई करना प्रारंभ कर दिया है लेकिन असिंचित क्षेत्र के किसान तो सिर्फ वर्षा पर ही निर्भर हैं। वर्षा न होने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

उमस और गर्मी कर रही बेहालः

वर्षा न होने से लोगों को उमस के कारण बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बैतूल शहर के कोठीबाजार क्षेत्र में सोमवार को करीब 10 मिनट तक तेज वर्षा हुई थी। इससे कुछ देर के लिए लोगों को उमस से राहत मिली लेकिन मंगलवार को दिन भी धूप के साथ उमस से लोग परेशान होते रहे।

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