युनूस खान/ दामजीपुरा।

ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं भगवान भरोसे चल रही हैं। आदिवासी विकास खंड भीमपुर के मोहटा में पिछले चार महीने से एक वार्डबाय और एएनएम अस्पताल चला रही हैं। इलाके के एक दर्जन से ज्यादा गांव की स्वास्थ्य सुविधाओं का दारोमदार इसी अस्पताल पर है। बदहाली के हालात यह हैं कि मोबाइल टार्च की रोशनी में कई बार यहां प्रसव कराना पड़ जाता है। बैतूल से करीब 130 किमी दूर स्वास्थ्य विभाग ने मोहटा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया है। यहां डाक्टर, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, आया, वार्डबाय का पद स्वीकृत है, लेकिन हालत यह है कि वर्षों से न डाक्टर हैं, न फार्मासिस्ट और नर्स मौजूद हैं। अस्पताल को एक एएनएम, वार्ड बाय और आया चला रही हैं। चार माह पहले यहां तैनात किए गए डाक्टर ने नौकरी छोड़ दी, तब से यह स्वास्थ्य केंद्र डाक्टर विहीन है। उसके पहले पदस्थ डाक्टर को भी भीमपुर में अटैच कर दिया गया था। तब से न तो वे वापस आए और न कोई व्यवस्था की गई।

अटैचमेंट का चल रहा खेलः

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मोहटा में तैनात लैब टेक्नीशियन और फार्मासिस्ट को दामजीपुरा में अटैच कर रखा गया है। जबकि स्टाफ नर्स को भीमपुर में अटैच किया गया है। जिसकी वजह से यहां के पद खाली हो गए हैं। अब ग्रामीणों को दवा से लेकर स्वास्थ्य परामर्श तक सिर्फ एएनएम और वार्डबाय के भरोसे है।

मोबाइल टार्च के भरोसे कराते हैं प्रसवः

ग्रामीण इलाका होने के चलते यहां कई बार दो-दो दिन बिजली नहीं रहती। इससे निपटने के लिए यहां सोलर पैनल लगाए गए हैं लेकिन यह एक साल से बंद पड़ा हुआ है। अस्पताल में हर माह करीब 15 प्रसव कराए जाते हैं। कई बार बिजली न होने पर यहां मोमबत्ती या मोबाइल टार्च की रोशनी में प्रसव कराने पड़ जाते हैं।

पूरे ब्लाक में दो डाक्टर ही पदस्थ है। उनकी सेवाएं भी शहरी क्षेत्र की हैं लेकिन यहां कोई नहीं है तो वे सेवाएं दे रहे हैं। मोहटा में डाक्टर के लिए प्रयास किए जा रहे है। चूंकि क्षेत्र दूरस्थ है तो कोई डाक्टर वहां रहना नहीं चाहता। दो एएनएम की भर्ती हुई थी उन्होंने ज्वाइन ही नहीं किया। यहां व्यवस्थाएं बनाने अब रोटेशन में सीएचओ की ड्यूटी लगाई जाएगी।

डा. ब्रजेश यादव,बीएमओ भीमपुर

Posted By: Nai Dunia News Network

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