बिना खेल मैदान के निजी स्कूल को मान्यता मिलने पर उठ रहे सवाल

आमला। नवदुनिया न्यूज

नगर के भीमनगर क्षेत्र में संचालित एक निजी स्कूल में खेल मैदान नही होने के कारण यहां के बच्चों को रेलवे की भूमि पर बनी हवाई पट्टी पर खेलने मजबूर होना पड़ता है। क्षेत्र के पालकों ने यह सवाल उठाया है कि शिक्षा के अधिकार के तहत स्कूलों में खेल मैदान होना अनिवार्य है। अगर स्कूल में खेल मैदान नही है तो स्कूल को मान्यता ही नही दी जाती है। मान्यता दिए जाने के लिए बाकायदा बीईओ ओर बीआरसी द्वारा स्कूल का निरीक्षण किया जाता है। इनकी रिपोर्ट के आधार पर ही मान्यता दी जाती है। आमला के भीमनगर में संचालित होने वाले स्कूल के पास स्वयं का खेल मैदान ही नही है और वर्षो से से बिना खेल मैदान के स्कूल को संचालित किया जा रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार निजी स्कूल के सामने रेलवे की जमीन है जहां हवाई पट्टी बनी हुई है। स्कूल के द्वारा मान्यता के लिए प्रस्तुत किए दस्तावेजो में हवाई पट्टी की जमीन को खेल मैदान के लिए बताया जाता है जबकि हवाई पट्टी तो रेलवे के अधीन है। ऐसे में स्कूल को बिना खेल मैदान के मान्यता दे दी गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल की भूमि और मान्यता के दस्तावेजो की जांच की जाए तो यह गड़बड़ी सामने आ जाएगी। इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी लखनलाल सुनारिया का कहना है कि इतने दिनों से स्कूल का संचालन किया जा रहा है और किसी के द्वारा शिकायत क्यों नही की गई। यदि इस संबंध में शिकायत की जाएगी तो वे प्राथमिकता के आधार पर जांच कराएंगे और गड़बड़ी मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी।

खेल मैदान हवाईपट्टी ही है

स्कूल का खेल मैदान हवाईपट्टी ही है। यहां पढ़ने वाले बच्चे हवाई पट्टी पर ही खेलते हैं।

घनश्याम साहू, प्रभारी प्राचार्य, गुरूनानक उच्चतर माध्यमिक स्कूल, आमला।