बैतूल। किस्मत के खेल निराले होते हैं, जिन बच्चों को जन्म देने वालों ने सड़कों पर छोड़ दिया था, उनका बचपन अब माता-पिता के साये में इटली की गलियों में बीतेगा। बैतूल जिले के आमला रेलवे स्टेशन पर जीआरपी को मार्च 2017 में लावारिस हालत में मिले दो साल के बालक और 7 साल की बालिका को इटली के पेर्डेनोने वेनिस शहर में रहने वाले दंपती ने गोद ले लिया है। मंगलवार को कानूनी प्रक्रिया के बाद अनाथ आश्रम से दोनों बच्चों को उनके सुपुर्द कर दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 7 मार्च 2017 को आमला रेलवे स्टेशन पर एक साल के भाई को गोद में लेकर बिलखती 6 साल की बालिका मिली थी। जीआरपी ने उन्हें परेशान हाल देखा तो पूछताछ की लेकिन उनके परिजनों के बारे में वे कुछ बता नही पा रहे थे। जीआरपी ने बाल कल्याण समिति छिंदवाड़ा को सूचना दी और दोनों को बैतूल के सेवा भारती द्वारा संचालित मातृ छाया बाल आश्रम में भेज दिया गया। छिंदवाड़ा जिले की बाल कल्याण समिति ने उनके परिजनों के बारे में पता लगाने की कवायद की लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिल पाया तो बच्चों को लीगल फ्री कर दिया गया। तब से दोनों बच्चे बैतूल के मातृ छाया बाल आश्रम में ही रह रहे थे।

इटली के दंपती बने माता-पिता

देश में अनाथ बच्चों को गोद देने की भूमिका निभाने वाली केन्द्रीय दत्तक संसाधन संस्था (कारा) के माध्यम से इटली के पेर्डेनोने वेनिस शहर में रहने वाले अल्बर्टो फिनेरो और उनकी पत्नी मारिया रोजा को बैतूल के मातृ छाया में रहने वाले भाई-बहन के बारे में पता चला। उन्होंने इन्हें गोद लेने की इच्छा जताई और संस्था के माध्यम से कागजी कार्रवाई शुरू की गई। एक साल से चल रही प्रक्रिया के बाद संस्था ने इटली के दंपती को बच्चों के पालक बनने के योग्य पाया। इसके बाद बैतूल में न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी करने के बाद न्यायालय के आदेश पर मंगलवार को बच्चों को उनके सुपुर्द कर दिया।

11 साल बाद घर में आई खुशियां

इटली के पेर्डेनोने वेनिस शहर में रहने वाले अल्बर्टो फिनेरो पेशे से वकील हैं और उनकी पत्नी मारिया रोजा एक निजी कंपनी में कार्य करती हैं दोनों ने 11 साल पहले विवाह किया था, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से उन्हें संतान का सुख नहीं मिल पाया। साल में उन्होंने बच्चा गोद लेने का निर्णय किया और भारतीय संस्कृति से बेहद प्रभावित होने के कारण उन्होंने भारत में बच्चे की तलाश शुरू की। अल्बर्टो ने बताया कि भारत के आध्यात्म से बेहद लगाव होने के कारण जब कारा संस्था के माध्यम से भाई-बहन के बैतूल के आश्रम में होने का पता चला तो उन्होंने अपनी पत्नी मारिया से इस संबंध में चर्चा की और फिर दोनों को गोद लेने का निर्णय लिया गया।

तीन साल से कर रहे काम

संस्था पिछले तीन साल से कार्य कर रही है और अब तक 13 बच्चों को गोद दिया गया है। यह पहला अवसर है जब बैतूल के आश्रम के बच्चों को विदेश के दंपती ने गोद लिया है - अरूण जयसिंहपुरे, सचिव मातृ छाया आश्रम, बैतूल।