LockDown in Madhya Pradesh : उत्तम मालवीय, बैतूल। कहते हैं उसने संसार में भेजा है तो पेट की आग का इंतजाम भी उसने ही कर रखा है। यह पंक्ति भले ही कर्म प्रधान न हो पर कहीं न कहीं सच के करीब तो है। सच इसलिए भी क्योंकि जरूरतमंदों के लिए मददगारों की संख्या भी कम नहीं। यह अलग बात है कि कुछ लोग शोर-शराबे के साथ मदद करने में विश्वास रखते हैं और कुछ खामोशी से मदद करके निकल जाते हैं। कोरोना संकट और उससे निबटने के लिए लॉकडाउन की अनिवार्यता के बीच कई गरीब परिवार ऐसे भी हैं जिनके घर के चूल्हे की आग ठंडी हो गई। ऐसे ही दीनों के लिए दयालु बनकर सामने आए लक्ष्मी-नारायण मंदिर में दानदाता, जो खामोशी से राशन के पैकेट मंदिर में रोजाना रख जाते हैं।

जरूरतमंद इन पैकेटों को ले जाते हैं और उनके घरों में चूल्हे जल उठते हैं। मप्र के बैतूल जिला मुख्यालय स्थित विश्वकर्मा समाज का लक्ष्मी नारायण मंदिर जरूरतमंद परिवारों के लिए लॉकडाउन के दौरान राशन समेत अन्य जरूरी वस्तुएं मुहैया करा रहा है। खास बात यह है कि मंदिर में यह सामान कौन रख जाता है और कौन ले जाता है, इसकी किसी को जानकारी नहीं होती है और न ही सामग्री देने के लिए यहां कोई सदस्य मौजूद रहते हैं। जरूरतमंद लोग भगवान के सामने मत्था टेकते हैं और सामान को प्रसाद समझकर बेझिझक ले जाते हैं।

विश्वकर्मा बढ़ई समाज समिति प्रमुख बलवीर मालवी की पहल पर समाज के सभी सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित करनी शुरू की गई। केवल जिले और जिले के बाहर के सदस्यों ने ही नहीं बल्कि अमेरिका में रहने वाले समाज के एक सदस्य ने भी सहयोग राशि प्रदान की। समाज के जितेंद्र उर्फ जित्तू मालवी बताते हैं कि जरूरतमंद प्रत्येक परिवार को सामग्री में एक कॉम्बो पैक दिया जा रहा है, जिसमें 5 किलोग्राम आटा, 2 किलोग्राम चावल, 1 किलोग्राम तुअर दाल, 1 लीटर तेल, आधा किलोग्राम बेसन, 1 किलोग्राम शक्कर और हल्दी, मिर्च, नमक, गर्म मसाला शामिल हैं। यह पैक मंदिर में रखे रहते हैं और जरूरतमंद परिवार आकर ले जाते हैं। शनिवार शाम तक 100 पैक लोग ले जा चुके हैं।

ग्लानि न हो, इसलिए पहचान उजागर नहीं करते

महिला मंडल अध्यक्ष सुषमा मालवी और युवा मंच कोषाध्यक्ष हर्ष मालवी बताते हैं कि यह पैक कौन ले जा रहे हैं, इसकी पहचान बिल्कुल उजागर नहीं की जाती है ताकि किसी को ग्लानि न हो। जरूरतमंद परिवारों की जानकारी भी ग्रुप में न देकर इसके लिए तय किए गए चार लोगों को ही व्यक्तिगत रूप से दी जाती है। इसके बाद संबंधित को सूचना पहुंचा दी जाती है और वे सामग्री ले जाते हैं। इस प्रक्रिया से समाज के जरुरतमंद सदस्य भी बिना किसी हिचक के मंदिर आते हैं और मत्था टेक कर सामग्री ले जाते हैं। उनका कहना है कि वास्तव में हमें समाज और मंदिर से जुड़ने के कारण ही इस विपत्ति के समय इतनी बड़ी मदद मिल सकी।

Posted By: Prashant Pandey

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