बैतूल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। बालिका दिवस के मौके पर चाइल्डलाइन बैतूल ने लल्ली चौक पर कार्यक्रम का आयोजन कर स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाली महिलाओं के संघर्ष को याद किया। इस मौके पर सभी ने संकल्प भी लिया कि बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और विकास में मदद करेंगे।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप मे कोतवाली टीआइ अपाला सिंह, बाल कल्याण समिति सदस्य वंदना कंभारे, योगिता रघुवंशी, सुनिल कुमार, दीपमाला खातरकर वर्षा खातरकर, खलिता विश्वकर्मा, रविशंकर चवारे, किरण उईके उपस्थित रहे। टीआइ अपाला सिंह ने बालिका दिवस की सभी को शुभकामनाएं देते हुये कहा कि जीवन में एक लक्ष्‌य बनाना चाहिए और उसे पाने के लिए कड़ी मेहनत करना चाहिए। एक दिन सफलता मिलेगी और उसके बाद आगे बढ़ने के कई अवसर भी प्राप्त होंगे। चाइल्डलाइन टीम सदस्य दीपमाला खातरकर ने बताया कि बालिका दिस की शुरुआत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार ने 2008 में की थी। यह दिवस 24 जनवरी को इसलिए मनाया जाता है क्योंकि भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 24 जनवरी 1966 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। देश के आजादी के स्वतंत्रता आन्दोलन में झांसी की रानी, सरोजनी नायडू ,बेगम हजरत महल, विजय लक्ष्‌मी पंडित ,किटटूर रानी चेन्नााई, भीकाजी कामा, सुचिता कृपलानी , ऐनीबेसेन्ट समेत कई महिलाओं ने भाग लेकर अपना योगदान दिया है। वर्ष 1930 में बैतूल के जंगल सत्याग्रह में देसली भीमपुर ब्लाक की आदिवासी महिला प्रमिला धुर्वे ने भाग लिया और अंग्रेजो के खिलाफ लड़ाई लड़ी। वंचित समुदाय की कई महिलाओं ने स्वतंत्रता आन्दोलन में योगदान तो दिया लेकिन स्वतंत्रता महिला सेनानियों का नाम इतिहास में ही नही है। प्रदीपन चाइल्ड लाइन ने जिले की महिला स्वतंत्रता सेनानी प्रमिला धुर्वे को याद करते हुए एवं स्वतंत्रता सेनानी की पहचान दिलवाने रांगोली से वीरांगना महिला की छबि बनाकर उनके बलिदान को याद किया। समाज की जवाबदारी है इन महिलाओ के बलिदान को याद किया जाना चाहिए और देश के इतिहास मे नाम जोड़ने के लिए आवाज उठाना होगा। समाज में हमारी गरीब दलित आदिवासी महिला और बालिकाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक व्यापारियों और पूंजीपतियों को आगे आकर बालिकाओं के साथ होने वाले अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाएं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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