बैतूल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। जिले में गन्नो की फसल पर पायरिला कीट का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। इससे पौधों का विकास थम रहा है और पत्तियां भी सूख रही हैं। फसल को कीट से बचाने के लिए किसान दवा का छिड़काव नहीं कर पा रहे हैं। शुगर मिल प्रबंधन ने किसानों की सुविधा के लिए ड्रोन मुहैया कराया है ताकि वे फसल पर दवा का छिड़काव कर सकें। सिंचाई की सुविधाओं में विस्तार और शुगर मिलों के प्रारंभ होने से जिले में गन्नो का रकबा तेजी से बढ़ गया है। पहले 10 से 12 हजार हेक्टेयर रकबे में गन्नो की बुवाई होती थी लेकिन अब करीब 40 हजार हेक्टेयर रकबे में किसानों ने गन्नो की खेती प्रारंभ कर दी है। चिचोली विकासखंड, आमला और बैतूल विकासखंड में तीन शुगर मिलें स्थापित हो गई हैं। इसके अलावा गुड़ बनाने के लिए 300 से अधिक भट्टी लगाई जाती हैं जिनमें उत्तर प्रदेश से आए लोग किसानों से गन्नाा खरीदते हैं। इस बार लगातार वर्षा के कारण गन्नाा की फसल में पायरिला कीट का प्रकोप भी बढ़ गया है। ग्राम हनोतिया के किसान संदीप चौधरी ने बताया कि करीब पांच एकड़ की गन्नाा फसल में पायरिला कीट लग गया है। आसपास के किसानों के खेतों में भी कीट का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। पिछले एक माह से वर्षा का दौर थमते ही कीट तेजी से बढ़े और पूरे खेतों को अपनी चपेट में ले रहे हैं। किसान अनिल जैन ने बताया कि गन्नो के खेतों में कीटनाशक दवा का छिड़काव करने के लिए किसान के पास कोई गुंजाइश ही नहीं है। फसल के भीतर घुस पाना ही संभव नही होता है इस कारण से किसान ड्रोन के भरोसे पर ही बैठे हुए हैं। इसमें भी खर्च अधिक आने से कई किसानों ने तो दवा का छिड़काव करने से ही तौबा कर ली है।

पौधों की पत्ती हो रही पीलीः

किसान शुभम महस्की ने बताया कि कीट का प्रकोप इतना अधिक हो गया है कि हर पत्ती के पीछे हल्के पीले -भूरे रंग के कीट बैठे नजर आ रहे हैं। 10 से 12 मिमी लम्बाई के इन कीटों के द्वारा गन्नो की पत्ती से रस चूसकर क्षति पहुंचाई जा रही है।ग्रसित फसल की पत्तियां पीली पड़ रही हैं। पौधों में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में बाधा आने की वजह से बढ़वार तो थम ही गई है उपरी हिस्से की सारी पत्ती पीली हो रही हैं और कई स्थानों पर तो काली भी पड़ने लगी हैं। जिन किसानों के द्वारा बंधाई का कार्य दो बार किया गया था उनके खेतों में तो गन्नाा की कतारों के मध्य पैदल चलने की जगह है जिससे वे पंप की मदद से कीटनाशक दवा का छिड़काव कर पा रहे हैं। जिन किसानों के द्वारा गन्नाा की बंधाई नही की गई है उनके खेत में तो कतार ही नजर नहीं आ रही है जिससे फसल के भीतर घुस पाना ही संभव नही हो पा रहा है।

पैदावार पर आएगा खासा असरः

बैतूल, आमला और चिचोली विकासखंड के गांवों में किसानों के द्वारा 300 से 500 क्विंटल प्रति एकड़ गन्नाा की पैदावार की जाती रही है। इस बार अतिवर्षा से फसल पहले ही प्रभावित हो गई थी और अब पायरिला कीट के कारण पैदावार घटकर आधी हो जाने का डर किसानों को सताने लगा है। किसान मयंक वर्मा ने बताया कि पिछले साल जितनी पैदावार हुई थी उसमें इस बार कीट प्रकोप के कारण कम से कम 30 प्रतिशत की कमी आ जाएगी।

शुगर मिल प्रबंधन ने मुहैया कराए ड्रोनः

सोहागपुर में स्थित श्रीजी शुगर मिल प्रबंधन के द्वारा किसानों की परेशानी को देखते हुए किराए पर ड्रोन मंगाए हैं। इनसे खेतों में गन्नाा की फसल पर कीटनाशक का छिड़काव कराया जा रहा है। मिल के प्रबंधक अनुज तोमर ने बताया कि गन्नो की पैदावार प्रभावित न हो इसके लिए ड्रोन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। रविवार से बैतूलबाजार, बडोरा क्षेत्र में दो ड्रोन से किसानों के खेतों में लगी गन्नाा की फसल पर कीटनाशक दवा का छिड़काव प्रारंभ कराया गया है। इसके पूर्व में भी दो ड्रोन की मदद से खेड़ली, मलकापुर, सिंगनवाड़ी, बटामा, हनोतिया समेत अन्य गांवों में गन्नाा की फसल पर छिड़काव कराया गया है। कृषि विज्ञान केंद्र के विज्ञानी वीके वर्मा ने बताया कि गन्नाा की फसल पर पायरिला कीट का प्रकोप सभी जगह देखने को मिल रहा है। किसानों को रासायनिक दवा के साथ मित्र कीटों का फैलाव भी करना चाहिए। यह कीट सामान्यतया अप्रैल से अक्टूबर के बीच में खेतों में दिखाई देता है, लेकिन अनुकूल मौसम मिलने से इसके प्रकोप की संभावना अधिक बढ़ जाती है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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