बैतूल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। जिले में तेज वर्षा का क्रम जारी रहने से नदी-नालों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। ताप्ती नदी में बाढ़ के कारण चंदोरा और पारसडोह के गेट खोल दिए गए हैं। इधर सारनी क्षेत्र में भी हो रही तेज वर्षा से सतपुड़ा जलाशय में जल स्तर बढ़ने से चार गेट खोल दिए गए हैं। जिले में पिछले 24 घंटे में मंगलवार सुबह आठ बजे तक 46.4 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। मंगलवार को दिन भर कभी तेज तो कभी हल्की वर्षा के जारी रहने से जनजीवन खासा प्रभावित हुआ। पिछले 24 घंटे में बैतूल विकासखंड में में 33.8 मिमी, घोड़ाडोंगरी में 44 मिमी, चिचोली में 29.1 मिमी, शाहपुर में 83.4 मिमी, मुलताई में 36.4मिमी, प्रभातपट्टन में 47.3मिमी, आमला में 70 मिमी, भैंसदेही में 53 मिमी, आठनेर में 53.3 मिमी और भीमपुर में 14 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। लगातार तेज वर्षा जारी रहने से पारसडोह जलाशय के चार गेट खोल दिए गए हैं। 637 मीटर जल भराव क्षमता के जलाशय में 15 अगस्त तक 637.33 मीटर जल स्तर बनाए रखा जा रहा है। तेज आवक होने के कारण चार गेट एक मीटर की ऊंचाई तक खोल दिए गए हैं। इनसे 518 क्यूसेक पानी प्रति सेकंड बाहर निकाला जा रहा है। ताप्ती नदी पर ही बने चंदोरा जलाशय के दो गेट मंगलवार सुबह आठ बजे खोल दिए गए हैं। सारनी में सतपुड़ा जलाशय के पांच गेट दो फीट की ऊंचाई तक खोले गए हैं। इन गेटों से 8675 क्यूसेक पानी प्रति सेकंड छोड़ा जा रहा है। जिले में मध्यम सिंचाई योजना के सापना जलाशय के वेस्ट वियर से भी 15.529 क्यूसेक पानी निकल रहा है। भू अभिलेख शाखा से मिली जानकारी के अनुसार जिले में इस सीजन में मंगलवार सुबह आठ बजे तक कुल 994.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई है जबकि गत वर्ष इस अवधि में 630.6 मिमी वर्षा हुई थी।

ताप्ती बैराज की दीवार बहीः

शहर में पानी की आपूर्ति करने के लिए नगरपालिका द्वारा ताप्ती नदी पर बनाए गए बैराज की एक ओर की दीवार फिर से बाढ़ में बह गई है। लगातार हो रही वर्षा से ताप्ती नदी उफान पर चल रही है। पारसडोह जलाशय के चार गेट खोलने से नदी में पानी और बढ़ गया है। इसी के चलते बैराज की दीवार बह गई और आसपास के हिस्से में मिट्टी का कटाव हो गया। इससे पानी दो किसानों के खेत में घुस गया और पूरी फसल बर्बाद हो गई है। ताप्ती बैराज का निर्माण पूरा होने के बाद पहली वर्षा में ही दीवार बह गई थी। इसके बाद बैराज निर्माण करने वाल चन्द्रा प्रायवेट लिमिटेड कंपनी ने इस साल जून के महीने में ही क्षतिग्रस्त हिस्से को गेब्रियन पद्धति से सुधारकर दीवार का निर्माण किया था। निर्माण में तकनीकी मापदंडों का पालन न किए जाने के कारण एक बार फिर से दीवार बाढ़ में बह गई है। किसान सुभाष बड़ोदे और राधा बड़ोदे के खेत में लगी सोयाबीन की फसल पानी के तेज बहाव से बर्बाद हो गई है। नगर पालिका के कार्यपालन यंत्री महेशचंद्र अग्रवाल ने बताया कि चन्द्रा कंपनी द्वारा काम में देरी और लापरवाही की है। गेब्रियन वाल का कितना हिस्सा टूटा यह बाढ़ का पानी उतरने के बाद पता चलेगा। निर्माण कंपनी से ही दोबारा क्षतिग्रस्त वाल की मरम्मत कराई जाएगी।

लबालब हो गए जलाशयः

लगातार हो रही वर्षा के कारण जिले में अधिकांश जलाशय लबालब होकर छलकने लगे हैं। बैतूल विकासखंड के ग्राम जगधर में स्थित जलाशय पिछले 13 साल बाद पहली बार पूरी तरह से लबालब हो गया है। बाकुड़ जलाशय भी शत प्रतिशत भर गया है। सोनखेड़ी जलाशय में भी शत प्रतिशत जल भराव हो गया है। बुंडाला जलाशय भी पूरी क्षमता के साथ भर गया है। इसके वेस्ट वियर से पानी निकल रहा है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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