Unique Campaign बैतूल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है..। बैतूल के युवा पहलवान छोटी सी पान की दुकान चलाने वाले अनिल यादव की जिंदगी पर यह लाइन बिल्कुल फिट बैठती है। अनिल उन लोगों के लिए एक प्रेरणा है जो बेटियों को बोझ समझते हैं। बेटी के नाम से हो घर की पहचान, लाडो फाउंडेशन के माध्यम से उन्होंने ऐसे लोगों की सोच को बदल दिया है। बेटियों के मान सम्मान के लिए वर्ष 2015 में शुरू किए गए इस अभियान ने 2555 दिन के सफर में 15 राज्य, 25 जिले और 100 से अधिक गांवों में काम किया। अब तक अभियान के तहत तीन हजार घरों को बेटियों के नाम की पहचान लाडो फाउंडेशन दिला चुका है।

मंगलवार को इस अभियान के सात वर्ष पूर्ण होने पर शहीद दीपक चौक पर विधायक निलय डागा ने बेटी आयुषी के हाथों से रिबन काटकर यात्री प्रतीक्षालय का शुभारंभ किया। अनिल यादव ने बताया कि बेटियों के नाम से हो घर की पहचान अभियान के माध्यम से पूरे देश में उद्देश्यपरक अलख जगी है।

राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत आज पूरे देश में तीन हजार से अधिक बेटियों के नाम से नेम प्लेट उनके घरों में लगाई जा चुकी है। मध्यप्रदेश के अलावा हरियाणा, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, उत्तराखंड, तेलंगाना, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, नई दिल्ली एवं अन्य आदि राज्यों में लाडो फाउंडेशन पूरी सजगता के साथ अपना कार्य कर रहा है।

बैंड बाजे और पुष्प बरसाकर करते हैं बेटियों का स्वागत

बेटियों का जन्मदिन हो, बेटियों ने जन्म लिया हो या बेटियों के मान सम्मान और अभिमान की बात हो, ऐसे अवसरों पर लाडो फाउंडेशन ने धूमधाम से गाजे-बाजे के साथ बेटियों के स्वागत करने की परंपरा भी शुरू की है। बेटी के जन्म पर बैंड बाजों के साथ माता पिता का अभिनंदन भी लाडो फाउंडेशन करता हैं। लाडो फाउंडेशन के इस परोपकारी एवं उत्कृष्ट कार्यों के लिए पूरे देश में यह अभियान सराहा जा रहा है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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