गोहद.भिंड। गोहद में चंबल क्षेत्रीय नर्मदा-सतपुड़ा ग्रामीण बैंक का अमानवीय कृत्य सामने आया है। बैंक ने आवास ऋण नहीं चुकाने पर 16 घरों में बच्चों, महिलाओं और पुरुषों को कड़कड़ाती सर्दी में बाहर निकाल कर ताला जड़ दिया है। बैंक कार्रवाई से खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर लोगों का कहना है कार्रवाई से पहले उन्हें नोटिस तक नहीं दिया गया। बैंक अधिकारी पुलिस बल के साथ अचानक आए सभी को हाथ पकड़कर घर से बाहर निकाला और कार्रवाई कर दी। रहवासियों ने गुरुवार को विधायक रणवीर जाटव और एसडीएम डीके शर्मा से गुहार लगाई है, लेकिन इनसे भी फिलहाल उन्हें कोई मदद नहीं मिली है।

यह है पूरा मामला

मुख्यमंत्री आवास योजना से गोहद के चंबल क्षेत्रीय नर्मदा-सतपुड़ा ग्रामीण बैंक ने वर्ष 2013 से 2016 तक आवास बनाने 197 हितग्राहियों को एक लाख से 60 हजार रुपए का लोन दिया था। इस लोन में 50 फीसदी राशि सरकार की ओर से सबसिडी के तौर पर बैंक को दी गई। गोहद चौराहा क्षेत्र के डांग सरकार और दिलीप सिंह का पुरा में करीब 70 लोगों ने लोन लिया था। बुधवार को इसी लोन की वसूली करने बुधवार दोपहर में डांग सरकार गांव में बैंक अधिकारी पुलिस बल के साथ पहुंचे। बैंक अधिकारियों ने गांव में 16 मकानों में रहने वाले लोगों को जबरन हाथ पकड़कर बाहर निकाला और दरवाजे पर ताला जड़कर घर को सील कर दिया।

गांव से आटा मांगकर किया खाने का इंतजाम

डांग सरकार में चरण सिंह बंजारा, कोक सिंह जाटव, भगवान सिंह बंजारा, धर्मपाल बंजारा, विनोद कडेरे, लखपत जाटव, राकेश कलीरे, अशोक, मनोज, लक्ष्मण सिंह जाटव, छविराम जाटव, रतन सिंह, प्रभु दयाल सहित अन्य लोगों के घरों में बैंक ने ताले जड़ दिए हैं। लीला देवी का कहना है कि उनके घर में गेट नहीं था तो बैंक अधिकारियों ने बक्से में ताला डाल दिया। इसी बक्से में खाने-पीने का सामान था। मिन्नातें करने के बाद भी बैंक अधिकारी मनमानी करते रहे। लीला देवी का कहना है पूरी रात परिवार कड़कड़ाती सर्दी में ठिठुरते रहे। गांव से आटा मांगा तब जाकर खाने का इंतजाम किया। सुनीता पत्नी चरण सिंह बंजारा ने कहा ताला डलने से उनके बच्चे भी सर्दी में ठिठुरते रहे। राजश्री का कहना है बहू की डिलीवरी हुई है। खाने-पीने का सामान बैंक वाले घर में सील कर गए।

विधायक के घर गुहार लगाने पहुंचे

बैंक अधिकारियों की हठधर्मिता का शिकार हुए गांव के लोग विधायक रणवीर जाटव से भी मिले। लोगों ने विधायक से गुहार लगाकर कहा कि सर्दी के सीजन में उनके घरों को खुलवाया जाए। एसडीएम डीके शर्मा से कहा कि उनके सामने तो भूखे मरने की नौबत आ गई है। दोनों जगह से गांव के लोगों को सिर्फ आश्वासन मिला। गुरुवार देर शाम तक कार्रवाई कुछ नहीं की गई।

लोन देने से पहले लिए थे 20-20 हजार

मकानों में सीलिंग की कार्रवाई से खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर गांव के लोगों का कहना है कि उन्होंने जब लोन लिया था तो बैंक मैनेजर और अधिकारियों ने उनसे 20-20 हजार रुपए ले लिए थे। इसके बाद 7-7 हजार रुपए और जमा किए हैं। महिलाओं ने बताया कि बुधवार को कार्रवाई के दौरान भी बैंक अधिकारियों को 2-2 हजार रुपए दिए हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें और उनके बच्चों को अफसरों ने खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर कर दिया है।

इनका कहना है

वर्ष 2013 से 2016 तक आवास ऋण दिया था। इन लोगों ने एक भी किश्त जमा नहीं की है। ऐसे में बैंक को मजबूर होकर वसूली प्रबंधक एलके तिवारी की मौजूदगी में यह कार्रवाई करना पड़ी।

देवेश चौहान, प्रबंधक, चंबल क्षेत्रीय नर्मदा-सतपुड़ा ग्रामीण बैंक

बैंक की ओर से यह कार्रवाई अमानवीय है। ऐसे मौसम में किसी को बेघर नहीं किया जा सकता है। कांग्रेस सरकार गरीब और किसान की सरकार है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बैंक मैनेजर को ग्रामीणों के घरों में डाले गए ताले खुलवाने के लिए कहा है।

रणवीर जाटव, विधायक, गोहद

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