- चंबल नदी में घटने लगा जलस्तर, फिर भी खतरे के निशान से 2 मीटर ऊपर

फोटो नंबर 17,19,20,21,22 सहितः-

नईदुनिया एक्सक्लूसिवः-

भिंड।

कोटा बैराज डैम से छोड़े गए पानी से चंबल नदी में पिछले 3 दिन से उफान है। इससे नदी किनारे के 13 गांव पूरी तरह से टापू बने हुए हैं। इन गांवों में बाढ़ से घिरे लोगो में अब बीमारी फैलना शुरू हो गई हैं। रविवार को ग्रामीणों के बीमार होने की खबर आई तो कलेक्टर छोटे सिंह ने मोटर बोट से मेडिकल टीम गांव भेजी। टीम को देवालय, नावली वृंदावन, मुकुटपुरा में करीब 140 मरीज मिले हैं। सबसे ज्यादा मरीज बुखार के हैं। राहत की खबर यह है पिछले 3 दिन से चंबल नदी में लगातार बढ़ रहा जलस्तर घट रहा है। पानी अभी खतरे के निशान से 2 मीटर ऊपर है। खतरे का निशान 122 मीटर पर है। रविवार दोपहर 1 बजे नदी में पानी 124.36 मीटर तक पहुंचा। दोपहर 2 बजे से जलस्तर प्रति घंटे 5-6 सेमी घट रहा है। रात 8 बजे नदी का जलस्तर 124 मीटर पर पहुंच गया है।

सरपंच के पिता जिला अस्पताल रैफरः

रविवार को कलेक्टर रेस्क्यू के दौरान अटेर पहुंचे थे। यहां बताया गया कि सरपंच गौरव राय के पिता पप्पू राय की तबीयत ज्यादा खराब है। गांव में और भी बीमार लोग हैं। कलेक्टर ने मोटर बोट से डॉ रंजीत राठौर को दवाएं लेकर मुकुटपुरा गांव भेजा। सरपंच के पिता की तबीयत ज्यादा खराब थी। उन्हें अस्थमा का अटैक आया था। बोट से ही डॉक्टर की टीम उन्हें अटेर लेकर आई। प्राइमरीज इलाज के बाद उन्हें जिला अस्पताल भिंड रेफर किया गया।

कलेक्टर ने किले पर चढ़कर लिया जायजाः

रविवार को काले के रेस्क्यू के दौरान कलेक्टर छोटे सिंह बाढ़ का जायजा लेने के लिए अटेर पहुंचे। यहां कलेक्टर ने ग्रामीणों से बात की। बातचीत करने के बाद कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ आरपी भारती, एसडीएम अभिषेक चौरसिया, डिप्टी कलेक्टर सिद्वार्थ पटेल, एसओ अनिल रघुवंशी के साथ अटेर किले पर पहुंचे। किले से कलेक्टर ने अटेर के गांवों में बाढ़ में फंसे गांवों का नजारा देखा। कलेक्टर ने कहा कि उन्होंने तीन गाडिय़ों में जनरेटर लगवाकर पूरी व्यवस्था कर दी है। रात में भी जरूरत होगी तो अमला मदद के लिए तैयार है।

सब खैरियत है, कहकर बैठे थे जिम्मेदारः

कोटा बैराज डैम से 15 अगस्त से 16 अगस्त के बीच छोड़े गए 1.87 लाख क्यूसेक प्रति मिनट पानी से चंबल नदी में उफान आ गया। 15 अगस्त की शाम से ही नदी के आसपास के बीहड़ में पानी भरना शुरू हो गया था। डैम से पानी छोड़े जाने की सूचना प्रशासन के पास भी थी। प्रशासन की ओर से कहा गया कि पूरी तैयारी है। 17 अगस्त की शाम को जब अटेर में नदी किनारे के 21 गांव में से 13 गांव पूरी तरह से टापू बन गए तब भी अटेर एसडीएम अभिषेक चौरसिया और जिम्मेदार अधिकारी यही कहते रहे कि सब खैरियत है, लेकिन 3 दिन से चंबल नदी किनारे टीले पर फंसे अनिल उर्फ काले यादव की हकीकत सामने आने से जिम्मेदारों को जवाब नहीं सूझ रहा।

हमारे गांव में तो कोई अलर्ट करने नहीं आयाः

टीम नईदुनिया रविवार दोपहर बाद नावली वृंदावन, देवालय गांव पहुंची। यहां ग्रामीण रामगोपाल यादव, राजेंद्र यादव और संदीप यादव ने बताया कि नदी में जब से उफान आया है तब से कोई अधिकारी अलर्ट करने के लिए भी नहीं आया। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के बाहर तक कोई अधिकारी या पटवारी आया हो तो कह नहीं सकते, लेकिन गांव में खैर खबर लेने कोई नहीं आया। ग्रामीणों ने कहा 2 साल पहले भी टीम नईदुनिया सबसे पहले आई थी। आज भी टीम नईदुनिया ने आकर मदद करवाई है। पटवारी जितेंद्र सोनी का कहना था वे खैराट सरपंच से मिले थे, उनसे पूछा जा सकता है कि हम लोग अलर्ट करने गए या नहीं। ग्रामीण गलत बोल रहे हैं।

डॉक्टर का जज्बा, बाढ़ का जोखिम उठाकर गांव पहुंचेः

बाढ़ में फंसे लोगों को राहत देने में प्रशासन ने भले ही कुछ कमियां की हों, लेकिन इस सिस्टम में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अपनी जान जोखिम में डालकर गांव के लोगों के बीच पहुंचे। अटेर अस्पताल में पदस्थ डॉ रंजीत सिंह राठौर अपनी जान जोखिम में डालकर मोटर बोट से मुकुटपुरा, नावली वृंदावन, देवालय गांव पहुंचे। यहां कैंप लगाकर ग्रामीणों की दवाएं दी। गांव में जो मरीज चलकर कैंप में आने लायक नहीं थे, उन्हें घर जाकर देखा और इलाज दिया।

वर्जनः

बाढ़ के हालात वाले गांवों में बीमार लोगों के लिए मेडिकल टीम भेजी है। प्रशासन की ओर से हर संभव मदद की जा रही है। हमने पूरे अमले को अलर्ट रहने के लिए कहा है। गाडिय़ों में जनरेटर की व्यवस्था तक करवाई है। रेस्क्यू के लिए मोटर बोट पहले से तैयार है।

छोटे सिंह, कलेक्टर, भिंड