भिंड । नईदुनिया प्रतिनिधि

शासन और प्रशासन अनुशासन से चलता हैं, और उन सबसे ऊपर होता हैं आत्मानुशासन। इसे चलाने के लिए ही इस प्रकार के महाराधना की आवश्यकता होती है। यह उद्गार मुनिश्री विशुद्ध सागर महाराज ने हाउसिंग कॉलोनी स्थित बद्रीप्रसाद की बगिया में आयोजित प्रवचन में दिए।

मुनिश्री ने कहा कि स्वर्ग का जो दृश्य आप लोग स्वर्गलोक में जाने के पश्चात देखते हो वह दृश्य आप लोग आज भिंड नगर में देख रहे हो। उन्होंने कहा कि विश्व में एक मात्र जैन समाज ऐसी समाज हैं जो अपने गुरु पर इतनी अधिक श्रद्धा रखती हैं। गुरुदेव जो मार्ग बताते हैं उस पर सम्यक श्रद्धा रखते हुए आगे बढ़ जाते हैं।

उन्होंने कहा कि जिनकी दृष्टि सभी की भलाई, सभी के कल्याण की भावना की होती हैं उनके सामने से बड़े से बड़ा उपद्रव टल जाते हैं और चारों और शांती छा जाती हैं। उन्होंने सभी उपस्थित जन समुदाय से कहा कि आप लोग देखो भगवान की आराधना करके कितनी मेहनत से ये पुण्य कमा रहे हो, लेकिन हम लोगों को अफसोस तब होता हैं जब इस पूंजी को आप लोग पतले वस्त्र पहन कर, अपने शरीर को आकर्षक दिखाकर उन पराए पुरुषों को लुभाने का कार्य करते हो और अपने इस पुण्य को नष्ट कर लेते हो। उन्होंने धर्म की परिभाषा बताते हुए कहा कि पाप को छोड़ने का नाम धर्म हैं। आप भले ही कोई भी पूजा मत करना लेकिन पाप को छोड़ देना। उन्होंने महिलाओं से कहा कि महिला संगीत, सार्वजनिक नृत्य बंद होना चाहिए। मुनिश्री ने कहा किगीत संगीत का कार्यक्रम रखें, लेकिन उसका जो रूप पहले चला करता था मुनिश्री ने कहा किजी वन में तीन गुरु होते हैं। इसमें पहला गुरु माता-पिता, दूसरा शिक्षा देने वाला और तीसरा भव सागर से पार लगाने वाला। इसलिए गुरु का हमेशा सम्मान करना चाहिए और उनके बताए मार्ग पर चलना चाहिए। इससे यह मानव जीवन बेकार नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस घर में सुख-शांति नहीं रहती है, वहां ईश्वर का वाास नहीं रहता है और जिस घर में शांति रहती है।

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Posted By: Nai Dunia News Network