भिंड। नईदुनिया प्रतिनिधि

शहर के प्राइवेट बस स्टैंड स्थित पीपल वाले हनुमान मंदिर पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा में पंडित सेवाराम शास्त्री ने अहंकार से बचने की सीख देते हुए मोह से बचने की सीख देते हुए सामाजिक कुरीतियों को त्यागने को कहा।

पंडित शास्त्री ने कहा कि जनकपुरी में गुरु विश्वामित्र के आदेश पर भगवान श्रीराम ने धनुष तोड़कर अहंकार को तोड़ा था। जब अहंकार धर्म की चादर ओढ़ लेता है तो उसे तोड़ना जरूरी हो जाता है। जब भी मानव मैं की भाषा में बात करता है तो ये अहंकार और अकड़ का प्रतीक होता है। कथा का आयोजन सत्संग मंडल द्वारा किया जा रहा है। इस मौके पर महाराज, शिवमोहन सरकार सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

श्री शास्त्री ने कहा कि संतों का स्वभाव सत्संग और दूसरों की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि एक समय की बात है एक संत नदी में स्नान कर रहे थे, तभी पानी के बहाव में बहता हुआ एक बिच्छु आया ओर संत ने अपने हाथों में उठाकर एक तरफ करने की कोशिश की। जैसे ही उन्होंने बिच्छु को उठाया, बिच्छु ने काट लिया। वह फिर पानी में गिर गया। संत ने फिर से उसे उठाया, उसने फिर संत को काट लिया। ऐसा कई बार हुआ। जब पास में ही स्नान कर रहे एक ग्रामीण ने यह नजारा देखा तो संत से कहा कि आप क्यों बचा रहे, यह आपको काट रहा है। संत ने कहा भाई इसका स्वभाव ही काटना है। तो ये काटेगा। संत का स्वभाव इसे बचाना है, इसलिए मैं इसे बचाऊंगा। इसलिए संतों का स्वभाव सत्संग और भक्ति करना होता है। उन्हें कभी भी फल की चिंता नहीं करनी चाहिए। श्री शास्त्री ने कहा कि श्रीमद् भागवत व्यक्ति को मर्यादा में रहकर जीवन जीना सिखाती है। आज व्यक्ति सब कुछ जल्द चाहते हैं। खाना जल्दी चाहिए। पानी जल्दी चाहिए। किसी मंजिल पर भी जल्द ही पहुंचना है। इस जल्दी ने लोगों को सब कुछ भुलाकर रख दिया है। इस जीवन में आकर भगवान की आराधना नहीं की, तो आपने कुछ भी नहीं किया। भगवान के नाम स्मरण करने से सभी संकट दूर हो जाते हैं।

यह भी कहा शास्त्री जी ने :

- संपत्ति त्याग के बाद ये कहना मैंने त्याग किया यह अहंकार है।

- जहां अहंकार होता है वहां प्रभु प्रेम नहीं होता। जहां प्रभु प्रेम होगा, वहां अहंकार नहीं।

- मेरा का मोह जीवन में अपनेपन के बंधन से बांधता है।

- कितना ही उच्च पद, प्रतिष्ठा, संपदा मिल जाए लेकिन कुल की परंपरा नहीं छोड़ना चाहिए।

- दहेज मांगने पर कन्या का हाथ नहीं देना चाहिए बल्कि हाथ पकड़कर मंडप से बाहर करना चाहिए।

- मूर्खों की मंडली में हंसने से हमेशा अपमान की आशंका रहती है।

- बहन के घर आना-जाना, सास के घर ज्यादा दिन ठहरना उतना बुरा नहीं जितना हाथ पसारकर मांगना।

फोटो सहित क्रमांक 7,8

Posted By: Nai Dunia News Network

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