सुनारपुरा। नईदुनिया न्यूज

शासन की तरफ से जिले के सभी सरकारी प्राथमिक व माध्यमिक स्कूलों में पढ़ाई के साथ छात्रों के लिए मध्या- भोजन की व्यवस्था की गई है। इस सुविधा के बाद बच्चों को पूरा समय स्कूल में रखकर बेहतर शिक्षा दी जाती है। वहीं दूसरी ओर गोरमी कस्बे के सरकारी प्राथमिक व मिडिल कन्या स्कूल में बच्चे बिना बर्तन के कागज पर मध्या- भोजन रखकर खाते हैं। इतना ही नहीं स्कूल में मध्या- भोजन करने के बाद छात्रों को पानी पीने के लिए अपने घरों में जाना पड़ रहा है। हेडमास्टर का कहना है कि स्कूल में बर्तन नहीं मिला है। साथ ही पानी की भी व्यवस्था नहीं है।

शासन बर्तन के लिए दे रहा 2400 रुपएः

शासन द्वारा समय-समय पर शासकीय स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए बर्तन के साथ हाथ धोने के लिए राशि भेजी जाती है। जिला पंचायत की तरफ से ब्लॉक के सभी स्कूलों में बच्चों को एमडीएम खिलाने के लिए बर्तन उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके लिए सकूल के प्रधानाध्यापक को 2400 रुपए की राशि प्रदान की जाती है। इतनी राशि में छात्रों के लिए थाली, चम्मच, कटौरी और गिलास उपलब्ध कराया जाता है। मगर सर्वोदय स्कूल के छात्र-छात्राओं को कागज पर रखकर मध्या- भोजन परोसा जाता है।

राख से साफ कर रहे बर्तनः

स्कूल में पढ़ने वाले छात्र राखी, भारती, निशा ने बताया कि उन्हें खाना खाने के लिए घर से अपने बर्तन लाने पड़ते हैं। जिन्हें वह राख से साफ करते हैं। स्कूल में हेडमास्टर द्वारा बर्तन उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं। अधिकतर छात्र अपने घरों से बर्तन लाकर मध्या- भोजन खाते हैं। लेकिन जो छात्र बर्तन नहीं ला पाते हैं, उन्हें कागज पर खाना रखकर खाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में शिक्षकों द्वारा उन्हें बर्तन नहीं दिए जाते हैं। जबकि स्कूल में बच्चों के लिए पर्याप्त बर्तन उपलब्ध कराए गए हैं।

7 साल से स्कूल में पानी नहीं:

सरकारी सर्वोदय स्कूल में 330 छात्र पढ़ाई के लिए आते हैं।स्कूल में काफी समय पहले पानी की सुविधा के लिए हैंडपंप लगाया गया था जो पिछले 5 साल से खराब पड़ा है। स्कूल में पानी के लिए दूसरा कोई साधन नहीं है। इससे बच्चे अपनी प्यास बुझा सकें। बच्चों को एमडीएम खाने के बाद गांव में घर जाकर पानी पीना पड़ता है। इससे छात्रों का समय बर्बाद होने के साथ पढ़ाई भी प्रभावित होती है। कुछ छात्र अपने घरों से बोतलों में पानी लेकर आते हैं। अगर शिक्षकों की बात की जाए तो वह गर्मियों में पानी का जुगाड़ स्वयं करके लाते हैं।

ऐसी स्थिति से गुजर रहे छात्र

मध्यप्रदेश शासन की तरफ से स्कूलों में पढ़ाई के लिए सर्व सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। निचले स्तर पर देखा जाए तो अधिकतर सरकारी स्कूलों में छात्रों को शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। इसका कारण शिक्षकों की मनमानी व प्रशासन की अनदेखी है।

प्रशासन नहीं दे रहा ध्यान

स्कूलों में मध्या- भोजन बनाने का दायित्व ग्रामीण क्षेत्रों में समूह और शहरी क्षेत्रों में स्कूल सचिवों को दिया गया है। स्कूलों में एमडीएम की जिम्मेदारी सौंपने के बाद प्रशासन द्वारा यह ध्यान नहीं दिया जाता है कि छात्रों को मैन्यू अनुसार ठीक से भोजन प्राप्त हो रहा है या नहीं। सरकारी सर्वोदय स्कूल में भोजन की स्थिति से बच्चों के पालकों ने प्रशासन को कई बार अवगत कराया है। प्रशासन व शिक्षा विभाग की तरफ से स्कूलों में जांच नहीं की जाती है किछात्रों को सुचारू रूप से मध्या- भोजन दिया जा रहा है या नहीं।

वर्जनः

बच्चों को स्कूल में एमडीएम खाने के लिए घर से बर्तन ले जाने पड़ते हैं। पानी के लिए भी स्कूल में साधन नहीं है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

राजवीर सिंह, स्थानीय निवासी ।

वर्जनः

स्कूल में जब से हम आए है। तब से बर्तन नहीं है। ऐसे में मजबूरी में बच्चों को कागज पर मध्या- भोजन दिया जा रहा है। बर्तन मंगाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखा है।

ओमनारायण मिश्रा, हेडमास्टर सरकारी कन्या मिडिल स्कूल गोरमी

फोटो सहित क्रमांक 8,9

Posted By: Nai Dunia News Network

fantasy cricket
fantasy cricket