वमीं पर जिलेभर में हुए भंडारे के आयोजन, बैंड बाजे की धुन पर किया विसर्जन

भिंड(नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिलेभर में आठ दिन से चल रहे नवरात्र का गुरुवार को नवमी पूजन के साथ समापन हो गया। नवमीं पर भक्तों ने मां दुर्गा की आराधना की और कन्याओं को भोजन कराकर अपना व्रत खोला। गुरुवार को नवमी मनाई गई। अब कल यानी शुक्रवार का दशहरा का पर्व मनाया जाएगा। दशहरे को लेकर तैयारियां की गईं हैं। कई स्थानों पर रावण दहन होगा। पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से तैयारियां कर ली हैं।

कन्याओं को कराया गया भोजन

आज गुरुवार को भक्तों ने मां दुर्गा की पूजा की और कन्याओं को भोजन कराकर व्रत खोला। इसी के नवमी पर नवरात्र का विधिवत समापन हो गया। नौवीं शक्ति मां दुर्गा की पूजा की पूजा के लिये दुर्गा मंदिर और जगह-जगह विराजमान मां की मूर्ति पर विशेष पूजा-अर्चना की गई। शहर के झांसी रोड, कृष्णा टाकीज रोड, वनखंडेश्वर रोड, आर्य नगर, वीरेंद्र नगर, बीटीआइ आदि क्षेत्रों में नौ दिन तक दुर्गा मां की विशेष पूजा-अर्चना की गई। गुरुवार को नवरात्र की नवमी को परंपरागत तरीके से मनाया गया। गौरी सरोवर किनारे कालेश्वर महादेव मंदिर पर सेवादल के जिलाध्यक्ष संदीप मिश्रा और उनके साथियों ने मिलकर विशाल भंडारे का आयोजन किया।

अंचल में नवमीं पर पूजा-अर्चना

जिले में मां दुर्गा पूजा महोत्सव के दौरान नौ दिनों तक भक्तों ने मां दुर्गा की घट की स्थापना कर माता के विभिन्ना स्वरूपों की पूजा की। पूजा-अर्चना में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। भक्तों ने माता के दरबार को आकर्षक तरीके से सजाया गया था। गोहद, मालनपुर, मेहगांव, गोरमी, लहार, असवार, रौन, मिहोना, दबोह, आलमपुर आदि क्षेत्रों में भी नवदुर्गा महोत्सव के आयोजन किए गए थे। लोगों ने नौ दिनों तक मां की भक्ति के साथ आराधना की। नवमीं के दिन मां की मूर्ति का आसपास के क्षेत्र की नदी तालाबों में विसर्जन किया गया। यहां बता दें, नवरात्र के नवमी तिथि को महानवमी के नाम से जाना जाता है। नवरात्र के आखिरी दिन मां दुर्गा की नौवीं और अलौकिक शक्ति मां सिद्धिदात्री की पूजा की गई। नाम से ही स्पष्ट है सिद्धियों को देने वाली मां सिद्धिदात्री हैं। कहते हैं कि इनकी पूजा से व्यक्ति को हर प्रकार की सिद्धि प्राप्त होती है।

खुशहाली के लिए महानवमीं पर हवन

गुरुवार को जिलेभर में महानवमी पर हवन किए गए। इस दिन हवन से घर की शुद्धि होती है। जीवन में खुशहाली आती है। घर का वास्तु अच्छा होता है और परिवार के सदस्यों में एक नयी ऊर्जा आती है। भक्तों ने नवमी के दिन तिल, जौ, गुग्गुल आदि से हवन किया। नवरात्र के आखिरी यानी नौवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा के लिए नवान्ना (नौ प्रकार के अन्ना) का प्रसाद, नवरस युक्त भोजन, नौ प्रकार के फल-फूल आदि का अर्पण किया गया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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