भिंड। राजस्थान के कोटा बैराज डैम से 2 दिन में छोड़े गए 4 लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी के कारण चंबल नदी में उफान है। नदी में उफान आने के कारण मंगलवार शाम को अटेर के 4 गांवों का रास्ता कट गया। इन गांव में रहने वाले करीब 1500 परिेवार बाढ़ में घिरे रहेंगे। नायत तहसीलदार केके शर्मा का कहना है गांव ऊंचाई पर हैं। ग्रामीणों को गांव खाली करने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया है। अब गांव का रास्ता खुलते तक ग्रामीण पानी में ही घिरे रहेंगे। अहतियात के तौर पर होमगार्ड जवानों को तैनात किया है।

पुलिया पर सुबह से आया पानीः

अटेर के नावली वृंदावन गांव की पुलिया पर मंगलवार सुबह 6 बजे से पानी आना शुरू हो गया था। सुबह 8 बजे नईदुनिया टीम पहुंची तो पुलिया पर करीब 6 इंच पानी चल र हा था। नईदुनिया टीम ने प्रशासन को पुलिया पर पानी आने की सूचना दी। इसके बाद प्रहासनिक और पुलिस अमला हरकत में आया। कलेक्टर डॉ इलैया राजा टी ने गांवों में अलर्ट करने के लिए नायब तहसीलदार केके शर्मा और पुलिस बल भेजा। मंगलवार देर शाम नावली वृंदावन की पुलिया पर कमर से ऊपर पानी आ गया है। इस कारण देवालय, खेराहट, नावली वृंदावन, मुकुटपुरा गांव का रास्ता कट गया है। इन गांव से अलग कछपुरा गांव के आसपास भी पानी भरना शुरू हो गया है।

इन गांवों में किया गया अलर्टः

चंबल किनारे बसे गांव अटेर, कछपुरा, खेराहट, नावली वृंदावन, मघेरा, दिन्नपुरा, नखलौली, मढ़ैया, कोषण की मढ़ैया, चिलौंगा, रमा, तरसोखर, नावलीहार, अकौन, अहरौली काली, , गड़ेर, चौम्हो, सूरजपुरा, विंडवा, कनैरा, सांकरी, ज्ञानपुरा में लोगों को मंगलवार को चंबल में आए रहे उफान के बाद दोबारा से अलर्ट किया गया है। लोगों के नदी के पास नहीं जाने की हिदायत दी है।

खतरे के निशान से ऊपर चंबलः

ग्वालियर-इटावा नेशनल हाइवे 92 स्थित चंबल नदी के पुल पर खतरे का निशान 119.80 पर है। कोटा बैराज से सोमवार और मंगलवार को लगातार 4 लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़े जाने से मंगलवार को शाम 9 बजे नदी में पानी खतरे के निशान से 1 मीटर ऊपर 120.80 पर पहुंच गया है। केंद्रीय जल आयोग इटावा उदी के स्थल प्रभारी बृजवीर सिंह के मुताबिक नदी में पानी का बहाव तेज है। रात में नदी का जलस्तर और ज्यादा भी बढ़ सकता है।

पहले यह रही चंबल में स्थितिः

2015 में 27 अगस्त को नदी में पानी खतरे के निशान से 2 मीटर ऊपर आया था। वर्ष 2014 में कोटा बैराज डैम से पानी छोड़े जाने के बाद चंबल नदी में सबसे ज्यादा पानी 9 अगस्त को 121.33 मीटर पर पहुंचा था।

1996 में बंद हुआ था पुलः

खतरे के निशान से पानी ऊपर होने के बाद भी चंबल नदी का बरही पुल बंद करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। चंबल पुल को सिर्फ 20 साल पहले 1996 में बंद किया गया था। तब चंबल नदी का जल स्तर 128.40 मीटर तक पहुंच गया था, जो खतरे के निशान से 9 मीटर ज्यादा था। नदी की गहराई से चंबल पुल की कुल ऊंचाई 130 मीटर है। ऐसे में पानी सिर्फ 2 मीटर नीचे रह गया था, जिससे पुल पर आवागन बंद कर दिया गया था। मंगलवार को खतरे के निशान से 1 मीटर पानी ऊपर आने के बाद भी पुल की ऊपरी सतह से पानी 9.20 मीटर नीचे है।

फैक्ट फोइलः-

119.80ः मीटर पर है चंबल पुल पर खतरे का निशान।

120.80ः मीटर पानी चंबल पुल पर मंगलवार को पहुंचा।

10ः सेमी की रफ्तार से बढ़ रहा है पानी चंबल में पानी।

121.33ः मीटर पानी पिछले साल 27 जुलाई को था चंबल नदी में।

1996 में 128.40 मीटर जलस्तर होने पर बंद किया था चंबल पुल

130ः मीटर है चंबल नदी के पुल की नदी की गहराई से कुल ऊंचाई

वर्जनः

नदी में बहाव तेज होने से नदी किनारे के गांवों में पहले भी मुनादी करा दी थी। अब दोबारा से मुनादी करा रहे हैं। तहसीलदार और पर्याप्त अमले को तैनात किया जा रहा है।

-डॉ. इलैया राजा टी, कलेक्टर, भिंड

वर्जनः

गांव में अभी तक राशन भी नहीं बंटा है। दवा बगैरह का इंतजाम भी नहीं किया गया है। सोमवार को नदी में पानी छोड़ा गया तो किसी ने आकर अलर्ट नहीं किया। रविवार को जरूर पटवारी आया था।

कर्मवीर सिंह भदौरिया, सरपंच, खैराहट

वर्जनः

पानी उतरने तक गांव में ही रहेंगे। गांव ऊंचाई पर है। सिर्फ रास्तों में बाढ़ का पानी भरता है। बाढ़ आने और उतरने तक करीब 4-6 दिन गांव में ही रहेंगे।

रणवीर सिंह, रहवासी, नावली वृंदावन गांव

वर्जनः

गांव में लोगों से बाहर आने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया है। गांव के सिर्फ रास्तों पर पानी भरता है। मंगलवार को रास्ते पर नदी का पानी आने से 5 गांवों के करीब 1500 परिवार फिलहाल गांव में ही रहेंगे।

केके शर्मा, नायब तहसीलदार, अटेर

Posted By:

fantasy cricket
fantasy cricket