भिंड(नईदुनिया न्यूज)। जिलेभर में माता के मंदिरों में शनिवार की नवमी के अवसर पर जवारे का विसर्जन, भंडारे सहित कई धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। इस बार तिथियों के उलट फेर की वजह से अष्टमी और नवमी को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनी रही।

जवारे विसर्जन के साथ नवरात्र का समापन हो गया। घरों में कलश स्थापित कर व्रत करने वाले भक्तों सहित अन्य श्रद्धालुओं ने मंदिरों में पहुंचकर विधि विधान से पूजा-पाठ की। इसके साथ ही मंदिरों में चल रही भजन संध्या, रामायण पाठ का समापन हो गया। हालांकि कुछ लोगा द्वारा रविवाद को नवमी मनाई जाएगी। इसके साथ ही चत्थर वाली माता मंदिर परिसर में श्री राधेकृष्ण समिति के द्वारा लोगों को प्रसाद बांटा गया। इसके साथ जिलेभर के कुछ मंदिरों पर कोरोना नियमों का पालन करते हुए भंडारे का आयोजन हुआ। पंडित अनिल कुमार मिश्रा ने बताया कि नवरात्र में इस बार दुर्गाष्टमी, नवमी और दशहरा को लेकर लोग दुविधा की स्थिति है। आपको बता दें कि पंचांग के आधार पर तिथियां अंग्रेजी कैलेंडर की तारीखों की तरह 24 घंटे की नहीं होती हैं। ये तिथियां 24 घंटे से कम और ज्यादा हो सकती हैं। पंचांग के अनुसार अष्टमी शनिवार को 11 बजकर 25 मिनट तक रही। इस वजह से शनिवार को नवमी मनाई गई। वहीं आज 25 तारीख को ही विजयादशमी महोत्सव का पर्व मनाया जाएगा।

नियमों का पालन करते हुए कार्यक्रमों का हुआ आयोजनः

17 अक्टूबर को नवरात्र स्थापना की गई थी। तब देवी प्रतिमाओं को स्थापित करने के साथ विभिन्ना धार्मिक आयोजनों की शुरुआत की गई थी। नवरात्र में जहां स्थापित दुर्गा प्रतिमाओं की प्रतिदिन आरती की गई, वहीं कई स्थानों पर भजन संध्या का आयोजन किया गया। वहीं चत्थर वाली माता, हजूरीपुरा, संतोषी माता सहित जिले के अन्य प्राचीन मंदिरों में नियमों का पालन करते हुए मेला लगाया गया। नवरात्र महोत्सव के दौरान शहर सहित जिलेभर में चल रहे धार्मिक कार्यक्रमों को समापन किया गया। समापन के अवसर पर हवन कर पूर्णाहुति दी गई।

माता के विसर्जन को लेकर भी मतभेदः

इस बार करोना संक्रमण को देखते हुए नियमों का पालन करते हुए माता के पंड़ाल लगाने की अनुमिति शासन द्वार दी गई थी। इसके साथ ही कुछ समितियों का कहना है कि वह रविवार को माता का विसर्जन नहीं करेंगे। क्योंकि रविवार और मंगलवार को मां की विदाई नहीं होती है। इस कारण रविवार की जगह सोमवार की सुबह में ही विसर्जन संबंधित कार्य किए जाएंगे। इसके साथ ही शासन द्वारा जारी गाइड लाइन के अनुसार मूर्ति विसर्जन संबंधित आयोजन समिति के द्वारा किया जाएगा मूर्ति को विसर्जन स्थल पर ले जाने के लिये अधिकतम 10 व्यक्तियों के समूह की अनुमति होगी। इसके लिए आयोजकों को पृथक से संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) जिला भिंड से लिखित अनुमति प्राप्त किया जाना आवश्यक होगा। कोविड संक्रमण को दृष्टिगत रखते हुए धार्मिक-सामाजिक आयोजन के लिए चल समारोह निकालने की अनुमति नहीं होगी विसर्जन के लिए सामूहिक चल समारोह निकालने पर रोक रहेगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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