ग्वालियर/भिंड/श्योपुर। पिछले पांच दिनों से बाढ़ की चपेट में आए ग्वालियर अंचल के तीनों जिलों में हालात कुछ हद तक संभले हैं। इसके बावजूद अभी भी मुरैना के 18 और भिंड के 68 गांवों में पानी भरा हुआ है। ऐसे में लोग अभी भी शिविरों में रुके हुए हैं। बाढ़ से हजारों हैक्टेयर में बोई गई फसल बर्बाद हो गई है। साथ ही घरों में भी खासा नुकसान हुआ है। मुरैना में पुराने राजघाट पुल से पानी नीचे उतर गया है, लेकिन अभी भी खतरे के निशान से ऊपर है। इस बीच प्रशासन ने नुकसान का सर्वे करवान शुरू कर दिया है। इधर चिंता की बात यह है कि बुधवार के मुकाबले कोटा बैराज से छोड़े जा रहे पानी की मात्रा में मामूली ही सही लेकिन वृद्धि की गई है।

श्योपुर : 312 घर और 4426 हैक्टेयर फसल बर्बाद

चंबल और पार्वती नदी की बाढ़ में हुए नुकसान का प्राथमिक सर्वे जिला प्रशासन ने करवा लिया है। रिपोर्ट गुरुवार को प्रभारी मंत्री लाखन सिंह यादव के सामने रखी गई। रिपोर्ट में बताया गया है कि 140 किमी एरिया में खड़ी 4426 हैक्टेयर की फसलें बाढ़ से बर्बाद हुई हैं। जिला प्रशासन ने खराब हुई फसलों के नुकसान का आकलन 3 करोड़ 63 लाख रुपए माना है। इसके अलावा बाढ़ की चपेट में आकर 312 कच्चे-पक्के मकान प्रभावित हुए हैं। इन 312 मकानों में से 7 मकान तो ऐसे हैं, जो पूरी तरह जमींदोज हो गए हैं। इसके अलावा अभी तक बाढ़ से 7070 लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 450 से ज्यादा को सुरक्षित निकाला गया।

मुरैना : 25 सौ से ज्यादा लोग अब भी फंसे

चंबल का जल स्तर बेशक कम हो रहा है, लेकिन अभी भी जिले के 18 गांवों के लोग पानी से घिरे हुए हैं और इनमें 25 सौ से अधिक लोग फंसे हुए हैं। बाढ़ की वजह से 52 गांव से अधिक प्रभावित हुए हैं। वहीं प्रशासन ने 4 हजार 300 लोगों को रेस्क्यू किया है। कलेक्टर प्रियंकादास के अनुसार बाढ़ की वजह से अंचल की 28 हजार 50 हैक्टेयर की फसल प्रभावित हुई है और 3 करोड़ के नुकसान की आशंका है।

इस बीच गुरुवार को कलेक्टर प्रियंकादास, एसपी डॉ. असित यादव, विधायक सुमावली एदल सिंह बोट से मउखेरा व कुल्हाड़ा गांव पहुंचे। वहां पर प्रभावित लोगों को रसद सामग्री दी। इसके अलावा अंबाह के मलबसई गांव सहित अन्य गांवों में भी प्रशासन ने रसद सामग्री बोटों से पहुंचाई। इन गांवों के लोग निकलने के लिए तैयार नहीं हैं।

विधायक एदल िंसंह ने कहा कि जिन बच्चियों की मौत हुई है, उनके परिजनों को 4-4 लाख की सहायता शासन से दिलाई जाएगी। साथ ही सभी फसलों का सर्वे कराकर किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।

भिंड : खतरे के निशान से अब भी 5 मीटर ऊपर बह रही चंबल

अब भी नदी का जलस्तर खतरे के निशान 122 मीटर से 5 मीटर ऊपर है। चंबल नदी में गुरुवार शाम 6 बजे पानी 127.15 मीटर है। इधर बाढ़ से घिरे गांवों में अब बदबू फैलने लगी है। इससे लोग बीमार हो रहे हैं। अटेर में 42 गांव के अलावा भिंड और लहार विधानसभा के 26 गांवों में सिंध, पहंुज नदी में उफान के बाद बाढ़ का पानी भरा है। बाढ़ के दौरान अटेर के 12 गांव, भिंड के 2 गांव और लहार विधानसभा के 2 गांवों में नदी किनारे के मकानों को खाली कराया गया था।

बाढ़ के बाद भयावह रूप लेती बीमारी से निपटने के लिए कलेक्टर छोटे सिंह ने चिकित्सा टीमें बना दी हैं। इन टीमों ने गुरुवार से काम शुरू कर दिया है। एसपी रूडोल्फ अल्वारेस भी सेना के मेजर के साथ जाकर ग्रामीणों को स्वास्थ्य के प्रति अपनाए जाने वाले उपाय बता रहे हैं। इधर कलेक्टर ने बाढ़ से 20 करोड़ के अनुमानित नुकसान का खाका सरकार को भेजा है।

इनका कहना है

बाढ़ प्रभावित लोगों को भू राजस्व संहिता के मुताबिक फसलों व घरों में हुए नुकसान का मुआवजा दिलाया जाएगा। पानी उतरने के बाद संभाग के तीनों जिलों में हुए नुकसान का सर्वे कराया जाएगा। इसके बाद राहत राशि के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।

-रेनू तिवारी, आयुक्त, चंबल संभाग

Posted By: Saurabh Mishra