लहार के रहावली उवारी गांव में खेरे वाली माता मंदिर परिसर में चल रही कथा

लहार । लहार तहसील की राहवली उवारी पंचायत में स्थित खेरे वाली बड़ी माता मंदिर परिसर में संत चुखर महाराज के नेतृत्व में भागवतकथा चल रही है। जिसमें कथावाचक आचार्य गोपी शास्त्री वृद्धांवन के द्वारा श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराया जा रहा है। जिसका समापन 28 जनवरी को होगा। कथा के तीसरे दिन रविवार को कथावाचक ने कहा कि संसार में सुख-दुख, दिन-रात, पाप-पुण्य, अमीरी-गरीबी, भला-बुरा सब व्याप्त है। इसलिए हमें बड़ी सावधानी से जीवन जीना चाहिए। सुख भी स्थायी नहीं है, तो दुख भी स्थायी नहीं है। रात पूरी होने पर दिन होता है और दिन की समाप्ति पर रात आ जाती है। जीवन में सुख और दुख आता जाता रहता है।

कथावाचक ने कहा कि दुनिया का हर इंसान सुख चाहता है। दुख कोई नहीं चाहता। वह दुख से डरता है, इसलिए दुख से छुटकारा पाने के लिए तरह-तरह के प्रयत्न करता है। मतलब दुख को खत्म करने और सुख को सृजित करने के लिए हर इंसान अपनी क्षमता के मुताबिक हमेशा कुछ न कुछ करता है। सुख और दुख, धूप-छाया की तरह सदा इंसान के साथ रहते हैं। लंबी जिंदगी में खट्ठे-मीठे पदार्थों के समान दोनों का स्वाद चखना होता है। सुख-दुख के सह अस्तित्व को आज तक कोई मिटा नहीं सका है। जीवन की प्रतिमा को सुंदर और सुसज्जित बनाने में सुख और दुख आभूषण के समान है। इस स्थिति में सुख से प्यार और दुख से घृणा की मनोवृत्ति ही अनेक समस्याओं का कारण बनती है और इसी से जीवन उलझनभरा प्रतीत होता है। जरूरत है इन दोनों स्थितियों के बीच संतुलन स्थापित करने की, सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की।

Posted By: Nai Dunia News Network

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