अब्बास अहमद. भिंड (नईदुनिया)।Madhya Pradesh News : भारत सरकार के उर्वरक पोर्टल से खाद विक्रेताओं का फर्जीवाड़ा पकड़ में आया है। विक्रेताओं (डीलरों) ने जिले में 20 किसानों को 449.74 मीट्रिक टन खाद बेचना बताया है। इतना खाद करीब एक हजार किसानों के खेतों में बोवनी के लिए पर्याप्त होता है। जाहिर है कि कालाबाजारी के लिए खाद गायब किया गया। भोपाल से कृषि विकास विभाग के प्रमुख सचिव अजीत केसरी ने कलेक्टर को जांच के निर्देश दिए हैं।

ऐसे समझें खाद घोटाला

1 हेक्टेयर भूमि में बोवनी के लिए करीब 45 किलो वजन की 2 बोरी खाद लगती है। 1 मीट्रिक टन में 45 किलो वजन की 22 बोरी खाद होती है। जिले के 20 किसानों को 449.74 मीट्रिक टन खाद बेचना बताया गया है। 449.74 मीट्रिक टन यानी 9894.28 बोरी खाद। इस खाद से करीब 5 हजार हेक्टेयर जमीन में बोवनी की जा सकती है। जिले में प्रति किसान औसत 2.5 हेक्टेयर जमीन है। इस हिसाब से 20 किसानों को 1 हजार किसानों के हिस्से की खाद दे दी गई।

कृषि उप संचालक से कराई गई जांच

कृषि विभाग के प्रमुख सचिव अजीत केसरी की ओर से आए पत्र के बाद कलेक्टर वीरेंद्र सिंह रावत ने 18 अगस्त को सभी एसडीएम को पत्र लिखा। एडीएम को पूरे मामले की जांच करना थी। जांच के लिए भोपाल से उन 20 किसानों के नाम भी दिए गए थे, जिन्हें डीलरों ने खाद बेचना बताया है। मार्केटिंग सोसायटी मेहगांव और गोहद, जैन खाद भंडार लहार, चौहान खाद भंडार गोहद, पंडित खाद भंडार, किसान सेवा केंद्र गोहद ने इन किसानों को खाद बेचना बताया है।

इनका कहना है

खाद की जांच रिपोर्ट मेरे पास आज ही आई है। अभी मैंने पूरी रिपोर्ट देखी नहीं है। गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

वीरेंद्र सिंह रावत, कलेक्टर, भिंड

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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