भिंड(नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिले में 130 से ज्यादा डेयरियों पर मावा बनाया जा रहा है। यहां तैयार मावा ग्वालियर-भोपाल के साथ देश के बड़े शहरों में जा रहा है। एक डेयरी पर औसतन रोजाना एक से डेढ़ क्विंटल मावा तैयार होता है। यानी जिले में रोजाना 28 लाख रुपये से ज्यादा करीब डेढ़ टन मिलावटी मावा का कारोबार है। महीने में यह टर्नओवर 8.42 करोड़ से ज्यादा का है। हालांकि जिले में 130 रजिस्टर्ड डेयरियों के अलावा अनरजिस्टर्ड डेयरियों की संख्या ज्यादा है। ऐसे में व्यापार का टर्नओवर और ज्यादा भी हो सकता है।

यह है मावा का व्यापारः

जिले में रजिस्टर्ड अनरजिस्टर्ड डेयरी मिलाकर 130 से ज्यादा स्थानों पर मावा बनाने का काम किया जा रहा है। एक डेयरी पर रोजाना एक से डेढ़ क्विंटल मावा तैयार किया जाता है। औसतन एक डेयरी पर रोजाना 120 किलो मावा तैयार किया जा रहा है। डेयरी से यह मावा 180 रुपए प्रति किलो के भाव से बाजार में बेचा जा रहा है। यानी एक डेयरी से रोजाना 21 हजार 400 रुपये का मावा बेचा जा रहा है। इस तरह 130 डेयरी से रोजाना 28 लाख 8 हजार रुपये का मावा बनाया जा रहा है। इस तरह जिले से एक माह में 8 करोड़ 42 लाख 40 हजार रुपये का मावा जिले से बाहर जा रहा है।

छह माह में सिर्फ 36 सैंपलः

जिले में जिस तरह से दूध डेयरी के जरिए नकली दूध और मावा का कारोबार फल-फूल रहा है, उस अनुपात में कार्रवाई नहीं हो पा रही हैं। यही वजह है किजिले के ज्यादातर गांवों में चोरी-छिपे भट्टियां लगाकर मावा बनाने का काम किया जा रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग के मुताबिक 1 जनवरी से 31 जुलाई तक कुल 125 सैंपल लिए हैं। इसमें 85 डेयरियों से सैंपलिंग की कार्रवाई हुई है। इनमें 8 सैंपल फेल हुए, जिन पर कार्रवाई लंबित है।

विभाग से भी जुड़े हैं तारः

जिले में नकली दूध और मावा तैयार करने की डेयरी संचालकों के तार खाद्य सुरक्षा विभाग में भी जुड़े हैं। करीब 4 साल पहले उस समय सामने आई थी, जब मेहगांव की तत्कालीन एसडीएम उमा करारे डेयरियों पर कार्रवाई के लिए रवाना हुई और रास्ते में ही विभाग के एक बाबू डेयरी संचालकों को टीम आने की सूचना दे रहा थे। मामला पकड़ में आने के बाद एसडीएम ने बाबू पर मेहगांव थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी।

लैब तक करते हैं कोशिशः

खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के दौरान दूध और मावा बनाने वाले लोग भोपाल स्थित सैंपल जांच लैब तक जाने का माद्दा रखते हैं। यही वजह है कि ज्यादातर मामलों में जांच के बाद के बाद सैंपल पास होकर आ जाते हैं। ऐसे में कई लोग कार्रवाई के बाद सीधे भिंड आकर खाद्य औषधि विभाग में आ जाते हैं।

इन डेयरियों पर नजरः

इस बार खाद्य औषधि विभाग ने नकली दूध और मावा का निर्माण रोकने के लिए कुछ डेयरियों को भी चि-ति किया है। विभाग की इस बार रामनिवास डेयरी मेहगांव, मां कैलादेवी डेयरी भिंड, अनुराधा डेयरी भिंड, श्री मां लक्ष्‌मी डेयरी, गोहद, वनखंडेश्वर डेयरी भिंड, शर्मा डेयरी भिंड, अनोध डेयरी अटेर, एआर डेयरी मेहगांव, एमएस डेयरी, गोरमी, श्री पतारे सरकार डेयरी दबोह, मुकेश डेयरी अटेर, बौहरे डेयरी मेहगांव, राजपूत डेयरी सोनी, विवेक डेयरी फूफ, आजी मां डेयरी मेहगांव, लक्ष्‌मी डेयरी अटेर रोड, राधिका डेयरी भिंड, न्यू सुरेश डेयरी भिंड, वीरेंद्र डेयरी भिंड, शिव डेयरी सालिम पुर, गिर्राज डेयरी भिंड, राशि डेयरी भिंड, रामनिवास डेयरी मेहगांव, कुशवाह डेयरी भिंड, आजिया डेयरी भिंड, मलखान डेयरी मेहगांव, ऊदल डेयरी गोरमी सहित करीब 80 डेयरियों के नाम शामिल हैं।

वर्जनथ

खाद्य पदार्थो में मिलावट करने वालों के खिलाफ हमारी टीमें समय-समय पर कार्रवाई करती हैं। चुनाव ड्यूटी क कारण कुछ कमी आई थी, लेकिन इस माह कार्रवाई में तेजी आएगी। हमारी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

रीना बंसल, खाद्य सुरक्षा अधिकारी भिंड

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close