भिंड। नईदुनिया प्रतिनिधि

जिला अस्पताल में अव्यवस्थाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। शुक्रवार को ओपीडी में डाक्टर सुबह 9 से 11 बजे तक बैठे। डाक्टरों ने मरीजों की जांच कर पर्चे पर दवा लिख दी, लेकिन जब मरीज दवा लेने पहुंच तो कर्मचारी दवा वितरण केंद्र को बंद कर वहां से चले गए। जबकि दवा के लिए लाइन में 20 से 25 लोग खड़े थे। ऐसे में मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ी।

यहां बता दें, कि रक्षाबंधन के दूसरे दिन शुक्रवार को अवकाश होने के कारण ओपीडी में डाक्टर मरीजों की परेशानी को देखते हुए सुबह 9 से 11 बजे तक बैठे। डाक्टरों ने ओपीडी में आए एक-एक मरीजों का चेकअप कर उन्हें जरूरत के मुताबिक पर्चे पर दवा लिख दी और वितरण केंद्र से दवा लेने के लिए कहा। बताया जाता है, कि दवा वितरण केंद्र पर दवा लेने के लिए मरीज व उनके स्जवनों की लंबी लाइन लगी थी। 11 बजे कर्मचारियों ने देखा कि डाक्टर चेकअप के बाद घर रहे हैं। वैसे ही कर्मचारियों ने वितरण केंद्र की खिड़की बंद कर दवा बांटना बंद कर दिया। जबकि खिड़की के बाहर लाइन में करीब 20 से 25 लोग दवा लेने के लिए खड़े थे।

मरीज बोले दवा नहीं कैसे होंगे सही -

वितरण केंद्र बंद और कर्मचारियों की मनमानी को लेकर मरीज व उनके स्वजनों में खासा आक्रोश हो गया। अटेर रोड निवासी बृजकिशोर पुत्र मातादीन शर्मा ने बताया कि खांसी के साथ बुखार है। डाक्टर ने दवा तो लिख दी। हम दवा लेने के लिए लाइन में खड़े थे। लेकिन कर्मचारी खिड़की बंद कर घर चले गए।

वर्जन -

मेरे बेटे को बुखार आ रह है। ओपीडी में डाक्टर ने चेकपअ दवा लिख दी है। दवा लेने के लिए लाइन में खड़े थे, लेकिन कर्मचारी ने खिड़की बंद कर दी है। जबकि में बाराकलां से आया हूं।

शंभूदयाल ओझा, निवासी बाराकलां

वर्जन -

मुझे खांसी-जुकाम के साथ बुखार है। डाक्टर ने दवा लिख दी, जब तक मेरा नंबर आया तो कर्मचारी ने दवा बांटना ही बंद कर दिया है। जबकि कर्मचारी को लाइन में खड़े लोगों को तो दवा देना चाहिए थी।

आशू, निवासी किला

वर्जन -

वितरण केंद्र की खिड़की तब तक बंद नहीं होना चाहिए कि जब तक लाइन में खड़े सभी मरीजों को दवा नहीं मिल जाती। मैं इस संबंध में जानकारी करता हूं।

डा. अनिल गोयल, सिविल सर्जन जिला अस्पताल भिंड

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Posted By: Nai Dunia News Network

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