भिंड-गोहद। ग्वालियर के महाराजपुरा वायुसेना एयरबेस से उड़ान भरने के लगभग 30 मिनट बाद मिग-21 प्रशिक्षण विमान (टाइप 69) गोहद के आलौरी गांव के चौधरी के पुरा में क्रैश हो गया। विमान ने बुधवार सुबह 9.30 बजे वायुसेना स्टेशन से उड़ान भरी थी ।

विमान टारगेट से करीब 6 एनएम की दूरी पर था तभी अचानक उसमें धुआं उठा और आग लग गई। विमान उड़ा रहे स्क्वाड्रन लीडर शिवानंद और साथ में सवार ग्रुप कैप्टन वायएस नेगी ने पैराशूट से कूदकर कर अपनी जान बचाई। विमान खेत में जाकर गिरा, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। बता दें कि शिवानंद को ट्रेनिंग दे रहे ग्रुप कैप्टन वायएस नेगी 27 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट में जैश ए मोहम्मद के आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक प्लानर थे। बहादुरी के लिए उन्हें हाल ही में भारत सरकार द्वारा युद्ध सेवा पदक भी दिया गया है।

घटना की सूचना मिलते ही वायुसेना का हेलिकॉप्टर चौधरी का पुरा गांव में पहुंचा। ग्रुप कैप्टन और स्क्वाड्रन लीडर को रेस्क्यू कर ग्वालियर के मुरार में सेना के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ट्रेनी स्क्वाड्रन लीडर शिवानंद को पीठ और गर्दन में चोटों लगी हैं। विमान क्रैश के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है। पूरे इलाके को वायुसेना ने अपने कब्जे में ले लिया है।

एक हिस्से में लगी आग, सिस्टम ने किया काम करना बंद

उड़ान भरने के करीब पंद्रह मिनट बाद ही मिग का वायुसेना स्टेशन से संपर्क टूट गया था। विमान ने सिस्टम ने काम करना बंद किया। दोनों पायलेट ने देखा कि उनके विमान में आग लग चुकी है। इसके बाद से दोनों हादसे को भांप चुके थे। इसीलिए उन्होंने पैराशूट के माध्यम से विमान से अलग होने से पहले उसे खेतों की ओर उड़ाने की कोशिश की।

विमान चौधरी का पुरा कि जिस खेत में क्रैश हुआ है, वह भिंड और ग्वालियर जिले के बॉर्डर का इलाका है। क्रैश वाले स्थान से कुछ दूरी पर ग्वालियर जिले का सरसपुरा, खुदूपुरा गांव है। खेत से कुछ दूरी पर आलोरी में चौधरी का पुरा गांव का रिहायशी इलाका है। विमान अगर यहां गिरता तो बड़ा हादसा हो सकता था।

आंखोदेखी- गांव के ऊपर था जलता जहाज, लगा कोई नहीं बचेगा

मैं धान की फसल की मेड़ पर भैंसे चरा रहा था। एक दम तेज आवाज सुनाई दी। देखा तो गांव के ऊपर जलता हुआ जहाज नजर आओ। तेज आवाज हो रही थी। मुझे लगा कि गांव पर गिरा तो कोई नहीं बचेगा। अचानक विमान तेज आवाज करता हुआ खेत में आकर गिरा। जहाज के जलते टुकड़े दूर तक खेतों में गिरे। बड़ी छतरी जैसी चीज (पैराशूट) से दो पायलट गिरे। एक को चोट ज्यादा थी, वो उठ नहीं पाए। दूसरे बैठ गए। उन्होंने फोन लगा दिया। जहाज गिरता देखकर गांव के लोग भी खेत की ओर भागे। जहाज गिरने के 20 मिनट में हेलिकॉप्टर से वायुसेना के अफसर आए। घायल पायलट को हेलिकॉप्टर से इलाज के लिए लेकर गए।

(जैसा मिग-21 क्रैश के सबसे पहले प्रत्यक्षदर्शी रामनिवास गुर्जर ने नईदुनिया को बताया)

फिर विवादों में मिग

इस क्रैश के साथ ही मिग की टेक्नोलाजी पर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे। 2012 में तत्कालीन रक्षामंत्री एके एंटोनी ने राज्य सभा में यह जानकारी दी थी कि 1963 से भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल मिग विमानों में से आधे एक्सीडेंट का शिकार हो गये हैं।