अब्बास अहमद, भिंड। RIP Irrfan Khan चंबल घाटी में बहुत से लोग इरफान खान को पान सिंह तोमर कहते हैं और कई लोग पान सिंह तोमर की कल्पना भी इरफान खान में ही कर लेते हैं। लेखक और फिल्मकार शाह आलम बताते हैं कि पहली बार एक सीनियर पत्रकार से बागी सूबेदार पान सिंह तोमर की कहानी सुनी थी, जिन्होंने उनसे एनकाउंटर के पहले चंबल के बीहड़ों में जाकर भेंट की थी। सूबेदार पान सिंह तोमर भी आत्मसमर्पण के लिए तैयार थे, लेकिन दुखद है कि सूबेदार की मौत की खबर आई। पान सिंह से पहले मोहर सिंह-माधो सिंह का समर्पण हुआ था और बाद में मलखान सिंह से फूलन देवी तक। दुर्भाग्य से पान सिंह के साथ ऐसा नहीं हो सका।

शाह आलम बताते हैं कि उन्होंने चंबल घाटी को साइकिल ने 2800 किमी से अधिक नापने के क्रम में चंबल घाटी का दस्तावेजीकरण किया था। जिसे लेकर 'बीहड़ में साइकिल नाम से किताब भी प्रकाशित हुई है। सूबेदार पान सिंह तोमर के गांव भिंडौसा जाकर लिखा गया था। इसी दौरान सूबेदार के भतीजे पूर्व बागी सरदार बलवंता से बातचीत हुई थी और पान सिंह तोमर की पत्नी इंदिरा देवी का इंटरव्यू लिया था।

पान सिंह तोमर का इतना लम्बा जिक्र इसलिए क्योंकि अब शायद इरफान खान के बिना पान सिंह तोमर को लेकर कोई बातचीत पूरी नहीं होती। वह इरफान खान ही थे, जिन्होंने पान सिंह तोमर को एनकाउंटर के करीब 4 दशक बाद जीवंत कर दिया था। फिल्मकार शाह आलम कहते हैं, कि एक्टर इरफान खान से पहली बार जामिया मिल्लिया इस्लामिया में मिला था। यहां वह वर्कशाप के लिए आए थे और हम लोगों ने वहां कैंटीन में सुबह का बना समोसा को शाम में खाया था।

दूसरी बार इरफान से भेंट जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में हुई थी, जब वह पंजाब से 'किस्सा की शूटिंग करके आए थे। चंबल घाटी में आजादी आंदोलन के महायोद्धा गेंदा लाल दीक्षित पर बायोपिक बनाने को लेकर लेखक बशारत पीर से बात हुई थी। पीर ने इस फिल्म के नैरेशन के लिए इरफान खान को राजी कर लिया था। फिर इरफान की बीमारी की खबर आई और आज जब भारत में हम लोग एक महीने से ज्यादा समय से महामारी में कैद हैं तो वहीं इरफान खान कैंसर से जूझते हुए दो साल तक कैद रहे और आज उनके न रहने की खबर से सन्ना रह गया।

आलम कहते हैं, कि पान सिंह तोमर में निभाया गया उनका किरदार बार-बार जेहन में तैर रहा है। चंबल के युवा पान सिंह और इरफान में फर्क ही नहीं कर पाते। सूबेदार की पत्नी इंदिरा देवी भी इरफान के द्वारा अपने पति के किरदार में इरफान के अभिनय की मुरीद हैं। बीहड़ और संसद का फर्क बताने वाले और चंबल की बागी परंपरा को फिल्मी पर्दे पर अपने अभिनय से जीवंत करने वाले इरफान खान इतनी जल्दी रुखसत हो जाएंगे इसकी तो सूबेदार पान सिंह तोमर का परिवार के परिवार को भी यकीन नही हो रहा है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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