Road safety Campaign भिंड (नईदुनिया प्रतिनिधि)। यातायात के सख्त नियम बनाए गए हैं। सड़क दुर्घटनाएं को कम करने के लिए ट्रैफिक चालान को भी पहले की तुलना में अधिक कर दिया गया है। ताकि लोग इन नियमों का कड़ाई से पालन करें, फिर भी शहर से लेकर हाइवे पर ट्रैफिक की नियमों को ताक पर रखकर वाहन चालक वाहन दौड़ा रहे हैं।

बता दें कि तेज गति से वाहन चलाना, नशे की हालत में गाड़ी चलाना और तीसरा गाड़ी चलाते समय नींद आ जाना सड़क दुर्घटना के तीन मुख्य कारण हैं। सड़क दुर्घटना में भारत का स्थान शीर्ष पर है। सड़क हादसों को कम करने के लिए जागरूक होना अतिआवश्यक है। ट्रैफिक सूबेदार नीरज शर्मा का कहना है कि हेलमेट पहनना, सीट बेल्ट लगाने के साथ आसपास के लोगों को भी इसके प्रति जागरुक करना जरुरी है। अभिभावक अपने बच्चों को घर पर यह शिक्षा जरुर दें कि घर से बाहर दुपहिया वाहन या फोर व्हीलर लेकर निकले तो हेलमेट या सीट बेल्ट का उपयोग जरुर करें।

शहर से लेकर हाइवे से मिलने वाली सड़कों पर क्रासिंग नहीं -

शहर के मुख्य मार्गों से लेकर हाइवे के किनारे स्थित स्कूलों तथा हाइवे से मिलने वाली सड़कों के क्रासिंग के पास कोई क्रासिंग नहीं बनाई गई है। इस वजह से अक्सर हादसे होते हैं। सड़क पार करने के लिए सड़कों पर सफेद पट्टियां बनाई जाती हैं। जिन्हें जेब्रा क्रासिंग कहा जाता है। ये जेब्रा क्रासिंग लोगों की सुविधा और सुरक्षा के लिए बनाए जाते हैं, जिससे गाड़ी चलाने वाले और रोड क्रास करने वालों को पता रहे कि रास्ता कहां से क्रास करना है। लेकिन इस ओर जिम्मेदार अधिकारियों का कोई ध्यान नहीं है।

इन नियमों का करें पालनः

वाहन चलाते समय हमेशा सीट बेल्ट पहलनें, गाड़ी चलाते समय सड़क पर रखें ध्यान, गति सीमा को पार न करें, ट्रैफिक सिग्नल का पालन करें, शराब पीकर वाहन न चलाएं, नियमित रूप से अपनी कार की करें देखरेख, ट्रैफिक सिग्नल का पालन करें, अपनी लेन में चलें, सुरक्षित दूरी बनाए रखें सहित अन्य नियमों का सख्ती से पालन करें।

सड़कों पर नाबालिग दौड़ा रहे वाहनः

शहर की भीड़ भरी सड़कों पर तेज गति से दौड़ते वाहन यातायात नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। इनमें नए बाइक चालक बने नाबालिगों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। इन पर रोकथाम के उपाय पुलिस नहीं कर पाती है। शहरी एवं नगरीय क्षेत्र में इस समय नाबालिग बच्चें दुपहिया वाहनों को अंधाधुंध दौड़ाते देखे जा सकते हैं। इनमें अधिकांश स्कूली किशोर बच्चे हैं जो खासकर संपन्ना परिवारों से हैं। उनके पालकों ने बिना मोटर व्हीकल की औपचारिकता पूरी किए बिना वाहन थमा दिए हैं। यह बाइक को मनचाही भगाते हैं, लेकिन उसको कंट्रोल नहीं कर पाते हैं। जिससे हादसे होते रहते हैं। इतना ही नहीं बेलगाम गति से दौड़ते वाहन चालक खुद तो घायल होते हैं, वहीं लोगों को भी चोटिल भी कर रहे हैं। शहर की अधिकतर सड़कों और गलियों पर बिना नंबर तथा बिना लाइसेंस के वाहन चलाते हुए लोगों को देखा जा सकता है। तेज गति से दौड़ते वाहनों में दोपहिया ही नहीं बल्कि कार, जीप, ट्रैक्टर भी शामिल हैं। सवारियां और स्कूली बच्चों से भरे होने के बावजूद गति कम करना अपनी शान के खिलाफ समझते हैं।

-शहर में एक भी ड्राइविंग स्कूल नहीं हैं, इस वजह से युवा मनमाने तरीके से सड़कों पर वाहन दौड़ाते हैं। अगर युवाओं का वाहन चालने की बारिकियां सिखाई जाएं, तो काफी हद तक सड़क हादसों पर रोक लगाई जा सकती है।

अमित जैन, समाजसेवी भिंड।

-यातायत नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन चालकों पर चेकिंग प्वाइंट लगाकर नियमित कार्रवाई की जाती है, वहीं शहर में चेकिंग प्वाइंट की संख्या जल्द ही बढ़ाई जाएगी।

रणजीत सिंह सिकरवार, यातायात प्रभारी भिंड।

Posted By: Nai Dunia News Network

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