Road Safety Campaign: भिंड (नईदुनिया प्रतिनिधि)। सड़क हादसों में सबसे ज्यादा मौत हमारे देश में होती हैं। हादसे में होने वाली मौतों से पीड़ित परिवार बिखर जाता है। अगर कमाऊ सदस्य की सड़क हादसे में मौत हो जाए तो पीड़ित परिवार भावनात्मक रूप से तो टूटता ही है। आर्थिक रूप से भी टूट जाता है। ऐसे में संबंधित व्यक्ति या पीड़ित परिवार समय पर मुआवजा मिल जाए तो काफी हद तक परेशानियां दूर हो जाती हैं। लेकिन हादसों के बाद वैज्ञानिक जांच न होने और बीमा कंपनी के सख्त नियमों की चलते क्लेम लेने के लिए लोगों को सालों चक्कर काटने पड़ते हैं।

जिलेभर की आदलतों में 1240 क्लेम संबंधित मामले लंबित हैं। पीड़ित परिवार के सदस्य या संबंधित व्यक्ति क्लेम लेने के लिए नियमों के जाल में फंसा हुआ है। जिसकी सबसे बड़ी वजह से हादसे के बाद मामले की वैज्ञानिक जांच का न होना और जागरूकता का अभाव है। अगर हादसे के बाद वैज्ञानिक जांच हो जाए तो काफी हद तक क्लेम समय पर मिल सकता है, लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। बता दें कि दुर्घटनाओं की वैज्ञानिक जांच कई विभागों के अधिकारी मिलकर करते हैं। जिसमें जिला स्तरीय परिवहन, पुलिस, पथ निर्माण व ग्रामीण कार्य विभाग के अधिकारियों का संयुक्त जांच दल बनाया जाता है। जिन दुर्घटनाओं में जान-माल का नुकसान अधिक होता है, वहां अनुसंधान कर देखा जाता कि आखिर किन कारणों से वह दुर्घटना हुई। अगर ओवरस्पीड के कारण दुर्घटना होगी तो उस स्थान पर ऐसे उपाय किए जाएं कि गाड़ियां अधिक रफ्तार से नहीं गुजर सकें। अगर सड़क में गड्ढे सहित अन्य खराबी के कारण दुर्घटना होगी तो पथ निर्माण और ग्रामीण सड़कों के होने पर ग्रामीण कार्य विभाग उसकी संरचना में आवश्यक सुधार हो सकें। वहीं, सड़क घुमावदार होगी या तीखा मोड़ होगा और चालकों को उसकी जानकारी नहीं मिल पा रही है तो विभाग की ओर से संकेतक,साइनेज लगाए जाएंगे। जांच के लिए होने वाले खर्च का भुगतान जिलास्तर पर गठित सड़क सुरक्षा परिषद के माध्यम से किया जाता है।

इस वजह से होते हैं सबसे ज्यादा हादसेः

ओवर स्पीड, ड्रिंक एंड ड्राइव, रांग साइड, रेड सिग्नल जंप करना, वालन चलाते समय मोबाइल पर बात करना सबसे बड़ी वजह है सड़क हादसों की। वहीं वाहन चलाते समय वाहनों के टायर का दबाव, ब्रेक पैड, तेल और कूलेंट, टायर की दशा, यात्रा के दौरान आसपास चल रहे अन्य वाहन चालकों द्वारा की जाने वाली गलतियां, अचानक वाहन को रोकना या मोड़ना भी हादसों की प्रमुख वजहों में से एक हैं।

ट्रैफिक पुलिस के प्रशिक्षण पर सवालः

बता दें कि यातायात पुलिस के द्वारा सिर्फ यातायात सप्ताह के तहत ही जगह-जगह पर शिविर लगाकर लोगों को ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूक किया जाता है। लेकिन अन्य दिनों में यह मुहीम ठप हो जाती है, वहीं स्कूल तक ही प्रशिक्षण शिविर सीमित रह जाते हैं, इस वजह से अन्य वाहन चालकों को ट्रैफिक नियमों की जानकारी नहीं मिल पाती। इस मामले में एडवोकेट प्रशांत दैपुरिया का कहना है कि अगर व्यापक स्तर पर जगह-जगह शिविर लगाकर वाहन चालकों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया जाए तो काफी हद तक सड़क हादसों पर अंकुश लग सकता है।

-सड़क हादसे के बाद अज्ञात वाहन को ट्रेस करने में सबसे ज्यादा समय लग जाता है, जोकि समय पर क्लेम न मिलने की सबसे बड़ी वजह बनता है।

हिमांशू शर्मा, एडवोकेट भिंड।

-वाहनों की फिटनेस, वाहन परमिट, रजिस्ट्रेशन, ड्राइविंग लाइसेंस सहित अन्य दस्तावेजों में कमी होने की वजह से पीड़ित परिवार के सदस्यों और संबंधित व्यक्ति को क्लेम के लिए सालों मशक्कत करनी पड़ती है।

अरुण शर्मा, एडवोकेट भिंड।

-मेरा भानजा मानसिक दिव्यांग है। वर्ष 2016 में इटावा रोड पर सड़क पार करते समय अज्ञात वाहन ने उसे टक्कर मार दी थी, जिससे वह गंभीर घायल हो गया था। हादसे के कुछ माह बाद पुलिस ने अज्ञात वाहन भी ट्रेस कर लियाा। लेकिन इसके बावजूद भी अब तक क्लेम नही मिला।

शकील खान, सरकारी इमामबाड़ा भिंड

Posted By: Nai Dunia News Network

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