भिंड। नवरात्र के आठवें दिन मंगलवार को अष्टमी का पर्व मनाया गया। कोरोना संक्रमण के चलते पिछले साल की तरह इस बार भी लोगों ने घर पर रहकर ही पूजा-अर्चना की। कोरोना संक्रमण के चलते सालों पुरानी यह परंपराएं इस बार भी नहीं निभाई नहीं जा सकीं। लोगों ने घर पर रहकर विधि-विधान से पूजन कर देवी मां से कोरोना महामारी खत्म करने की प्रार्थना की। इसके साथ ही आज से शादियों के शुभ मुहूर्त शुरू हो जाएंगे।

गली-मोहल्लों के मंदिरों पर पहुंचे लोग

अष्टमी के दिन इस साल भी प्राचीन मंदिर बंद रहे। वहीं अष्टमी की पूजा-अर्चना करने के लिए श्रद्धालुगण गली-मोहल्लों के मंदिर पर पहुंचीं। इस दौरान ज्यादातर लोग नियमों का पालन करते हुए दिखाई दिए।

रामनवमी आज, शादियों के शुभ मुहूर्त शुरूः रामनवमी पर 21 अप्रैल से शादियों के शुभ मुहूर्त की शुरुआत होने जा रही है, ऐसे में शादी समारोह वाले परिवार भी इनकी तैयारियों में जुटे हुए हैं। प्रदेश सहित जिले में बढ़ते कोरोना संक्रमण के खतरे ने इन परिवारों की परेशानी भी बढ़ा दी है। इस बार अप्रैल व मई माह में शादियों की धूम है तथा जिले में सैकड़ों शादी समारोह होने हैं, मगर सरकार की गाइड लाइन ने इन परिवारों को असमंजस में डाल दिया है। कोरोना के रफ्तार पकड़ने के साथ ही पहले शादी समारोह में मेहमानों की संख्या 50 व्यक्ति (बंद हाल) में और खुले में 100 व्यक्ति कर दी गई थी। कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ने के कारण सरकार द्वारा सख्ती की जा रही है। ऐसे में शादी समारोह वाले परिवार मेहमानों को बुलाने या न बुलाने के फेर में उलझे हुए हैं, तथा तैयारियों को लेकर भी निर्णय नहीं ले पा रहे हैं।

15 जुलाई से 15 नवंबर तक मांगलिक कार्य नहीं:

पंडित श्याम सुंदर पाराशर ने बताया 20 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल देवशयनी एकादशी होने से वैवाहिक या मांगलिक कार्य नहीं हो पाएंगे। 15 नवंबर को कार्तिक शुक्ल देवउठनी एकादशी से मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। मई और जून में विवाह के लिए अधिक मुहूर्त हैं। इन तिथियों के साथ ही अप्रैल में रामनवमी व अन्य त्यौहारों पर भी देव मुहूर्त रहता है, जिसमें भी विवाह कर सकते हैं। अप्रैल से शुरू हो रहा वैवाहिक मुहूर्त 16 जुलाई तक रहेगा। इसके बाद चातुर्मास लगने से मांगलिक कार्यक्रम बंद हो जाएंगे।

अप्रैल से जुलाई तक 4 अबूझ मुहूर्तः

खरमास के बाद इस साल शादियों के लिए 55 मुहूर्त हैं, जिनमें चार अबूझ हैं, जिनमें 21 अप्रैल को रामनवमी के बाद 14 मई अक्षय तृतीया, 26 मई को पीपल पूर्णिमा और 18 जुलाई को भडली नवमी पर भी अबूझ मुहूर्त हैं। गत साल विवाह के 49 मुहूर्त थे। इन चार अबूझ मुहूर्त पर सबसे अधिक शादियां होनी है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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