भिंड। भिंड के मौ कस्बे में एक दर्दनाक हादसे में एक मासूम की डूबने से मौत हो गई। घटना में मृतक बच्चे के साथ उसका भाई भी डूबा था जिसे लोगों ने बचा लिया। ये दोनों भाई खेलते-खेलते तालाब किनारे पहुंचे थे। नहाने के लिए तालाब में पहले 7 साल का छोटा भाई उतरा तो उसका पांव फिसला और वह डूबने लगा। छोटे भाई को डूबता देख 9 साल का बड़ा भाई बचाने तालाब में उतरा, लेकिन वह भी डूबने लगा। पास खड़े युवक ने बड़े भाई को बाहर निकाल लिया।

बाहर निकलने पर मासूम ने रोते हुए कहा, छोटा भाई तालाब में है। युवक ने दोबारा छलांग लगाई और दूसरे मासूम को बाहर निकाला। मासूम की सांस चल रही थी। परिजन उसे इलाज के लिए सरकारी अस्पताल ले गए, लेकिन रविवार होने से अस्पताल बंद मिला। मासूम को प्राइवेट डॉक्टर के पास ले जाया गया, लेकिन इलाज से पहले ही उसने दम तोड़ दी।

खेल-खेल में ऐसे चले गए तालाब किनारे

मौ कस्बे में टेलिफोन एक्सचेंज के पास वार्ड 14 के निवासी मुन्ना राइन का बड़ा बेटा फैजान (9) अपने साथ छोटे भाई फारान (7) को लेकर रविवार दोपहर करीब 1 बजे घर से बाजार में सब्जी लेने निकला। दोनों भाई सब्जी लेने के बजाए खेलते हुए गल्ला मंडी स्थित बरौआ तालाब किनारे पहुंच गए। तालाब में नहाने के लिए पहले फारान उतरा तो उसका पैर फिसला और वह डूबने लगा। फारान को बचाने फैजान तालाब में उतरा तो वह भी डूबने लगा। फैजान को डूबते हुए किराएदार जावेद खान पुत्र अजमेरी खान निवासी कौंच उत्तरप्रदेश ने देख लिया।

जावेद ने एक मिनट की देर किए बिना तालाब में छलांग लगाई और फैजान को बाहर निकाल लिया। फैजान के पेट में पानी भर गया था। संभलने पर फैजान ने रोते हुए जावेद से कहा कि फारान तालाब में ही है। फैजान की बात सुनकर जावेद ने तालाब में दोबारा छलांग लगाई और फारान को भी बाहर निकाल लिया गया।

सांस चलती देख जिंदगी की उम्मीद जगी

फारान को पानी से बाहर निकाला तो उसकी सांस चल रही थी। परिजन को उम्मीद जागी कि उसकी जिंदगी बच जाएगी। दौड़ते हुए फारान को सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन रविवार होने से अस्पताल बंद था। अब परिजन अस्पताल से दौड़ते हुए फारान को प्राइवेट डॉक्टर के पास लेकर पहुंचे। डॉक्टर इलाज शुरू करता, उससे पहले ही फारान की सांसें थम चुकी थी, जिससे परिजन की उम्मीद भी टूट गई।

अस्पताल में इमरजेंसी सेवाएं तो होना चाहिए

फारान की जिंदगी परिजन के देखते देखते आंखों के सामने फिसली। कस्बे में जिसने भी इस घटनाक्रम को सुना तो उसे सरकारी व्यवस्थाओं पर गुस्सा जरूर आया। लोगों का कहना है कि रविवापर को भी सरकारी अस्पताल में इमरजेंसी सेवाएं तो होना चाहिए, जिससे किसी को असमय मौत की गोद में जाने से बचाया जा सके। लोगों का कहना है कि मौ कस्बा राज्यमंत्री लाल सिंह आर्य के विधानसभा क्षेत्र में है, लेकिन इसके बावजूद यहां स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं।

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