अंजली राय, भोपाल । महज 14 साल की उम्र में विवाह का दंश झेल चुकीं सामली ने इसे अवरोध नहीं प्रगति का माध्यम बना लिया। सामली ने मध्य प्रदेश के आदिवासी जिलों से बाल विवाह की कुरीति मिटाने का बीड़ा उठाया। खुद कभी स्कूल नहीं गईं लेकिन चार बेटियों को पढ़ायालिखाया। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण सामली ने पति के साथ खेती के काम में मदद शुरू की।

खेतों में गईं तो इतने नवाचार किए कि खुद को महिला किसान के रूप में स्थापित कर लिया। हालांकि महिला किसान का दर्जा पाने के लिए भी लड़ाई लड़नी पड़ी। पहले खुद को आत्मनिर्भर बनाया, फिर महिला किसान संगठन बनाकर सैकड़ों महिलाओं को जोड़ा और उनका जीवन बदल दिया।

आदिवासी बहुल मंडला जिले की सामली की उपलब्धियों की कहानी यही खत्म नहीं होती। महिला किसान संगठन के साथ मिलकर धान, मक्का, गेहूं, चना उत्पादन और पशुपालन का कार्य भी करने लगीं। इसके बाद बुढ़नेर नर्मदा महिला संघ से जुड़कर महिलाओं को खेती, पशुपालन जैसे कार्य भी सिखाने लगीं। खेतों से अच्छा उत्पादन होने लगा तो फसल को उचित दाम पर बेचने की चिंता हुई।

इसका भी समाधान निकाला और उपज बेचने, उसकी मार्केटिंग के लिए अन्य महिलाओं के साथ जुड़कर मोहगांव वूमेन ग्रोर्वर्स कंपनी बनाकर कई महिलाओं को रोजगार दिया। आज इनके संगठन में करीब पांच हजार महिलाएं जुड़ी हैं। ये सब उपलब्धियां पिछले एक दशक की ही हैं।

सामली ने मंडला, सिवनी, शिवपुरी आदि कई जिलों में 400 से अधिक बाल विवाह रुकवाए। अब वे घरेलू हिंसा के मामलों में पंचायत के साथ मिलकर महिलाओं को न्याय दिलाने की पहल करती हैं, उन्हें आत्मनिर्भर बनाती हैं। वे अब तक 368 महिलाओं को घरेलू हिंसा के केसों में न्याय दिलवाने की पहल कर चुकी हैं।

सामली को इन उपलब्धियों के लिए कई राज्य स्तरीय पुरस्कार मिल चुके हैं। हाल ही में उन्हें भोपाल में गौरवी संस्था की ओर से आयोजित पुरस्कार समारोह में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया।

424 लड़कियों को दिलवाई उच्च शिक्षा

सामली खुद तो बिलकुल नहीं पढ़ पाईं लेकिन आदिवासी जिलों की 424 लड़कियों को उच्च शिक्षा दिलवाने में मदद की। वे खुद यह ध्यान रखती हैं कि उनके संगठन से जुड़ी किसी महिला की बेटी की पढ़ाई न रुके। संगठन के युवा शास्त्र कार्यक्रम लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा में मदद करता है।

उनकी चार बेटियों में से एक पोस्ट ग्रेजुएशन, दूसरी इंजीनियरिंग, तीसरी नर्सिंग और चौथी 11वीं कक्षा में पढ़ाई कर रही है। सामली कहती हैं कि बेटियों की शादी के लिए रिश्तेदार बहुत दबाव डालते हैं, लेकिन मैं उन्हें पढ़ा-लिखाकर आत्मनिर्भर और काबिल बनाना चाहती हूं।

पिता की संपत्ति में लिया हक

सामली के दो भाई और एक बहन भी हैं। जब इन्हें समझ में आया कि बेटी का हक माता-पिता की संपत्ति में भी होना चाहिए तो इसके लिए वे मायके पहुंची और माता-पिता की संपत्ति में हक लिया। हक के साथ वे उत्तरदायित्व भी पूरा कर रही हैं। अब मायके में भी खेती करवाती हैं और बुजुर्ग माता-पिता का ख्याल भी रखती हैं।

हस्ताक्षर करना सीखा

जब सामली संगठन से जुड़ी और कई जिलों में जाकर महिलाओं को प्रेरित करने लगी तो उन्हें अहसास हुआ कि अंगूठा लगाना उचित नहीं तो उन्होंने हस्ताक्षर करना सीखा और अक्षरों के सामान्य ज्ञान के लिए पढ़ाई की। पहले बोलने में झिझक थी, अब संगठन में महिलाओं को संबोधित कर लेती हैं।

- आदिवासी जिलों में महिलाओं को घर से बाहर निकलने और आत्मनिर्भर बनाने में सामली का काफी योगदान काफी है। - अर्चना सिंह, इंटीग्रेटर, प्रदान संस्था

Posted By: Sandeep Chourey

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