भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। दिल्ली-चेन्नई रेल मार्ग पर बरखेड़ा से बुदनी के बीच 200 मीटर लंबी तीसरी सुरंग का काम भी पूरा कर लिया है। इस रेलखंड में तीसरी रेल लाइन बिछाई जा रही है, जो पहाड़ों और घने जंगलों के बीच से होकर गुजरेगी। बाघ, तेंदुए समेत वन्यप्राणियों के आवागमन में रेल लाइन बाधा न बनें, इसके लिए पांच स्थानों पर पहाड़ों के अंदर से सुरंगें बनाई जा रही है। इनमें से दो सुरंगों के निर्माण का काम पहले ही पूरा कर लिया था। अब तीसरी सुरंग का काम भी पूरा हो चुका है। इसके अलावा दो सुरंगें निर्माणाधीन हैं। बरखेड़ा-बुधनी रेल खंड दुर्गम रेलखंडों में से एक है। यहां पहले से दो रेल लाइनें हैं। तीसरी रेल लाइन को जल्द शुरू करने की योजना है। इस पर रेल यातायात शुरू होने के बाद यात्री ट्रेनें भोपाल से इटारसी के बीच करीब 100 किलोमीटर की दूरी 15 से 20 मिनट पहले तय कर लेंगी।

बता दें कि दिल्ली-चेन्नई रेल मार्ग उत्तर-दक्षिण को जोड़ने वाला सबसे व्यस्त रेल कारिडोर में से एक है, जिस पर क्षमता से अधिक ट्रेनों का संचालन होता रहा है। यह रेलमार्ग भोपाल रेल मंडल के बीना, भोपाल-इटारसी से होकर गुजरता है। इसी रेल मार्ग पर बरखेड़ा-बुधनी (घाट सेक्शन) है, जिस पर 26.50 किलोमीटर तीसरी रेल लाइन परियोजना का काम चल रहा है। रेल मार्ग पर दबाव को कम करने के लिए तीसरी रेल लाइन बिछाई जा रही है। बीना से भोपाल, भोपाल से बरखेड़ा और बुधनी से इटारसी के बीच तीसरी रेल लाइन पर आवागमन पहले ही शुरू हो चुका है।

बाघ, तेंदुए का जीवन आसान बनाएंगी रेल पटरी पर बनाई जा रही सुरंगें

सुरंग-1 की लंबाई 1080 मीटर, सुरंग-5 की लंबाई 530 मीटर व सुरंग-3 लम्बाई 200 मीटर है। इनका निर्माण कार्य पूरा कर लिया है। सुरंग-2 की लंबाई 200 मीटर व सुरंग-4 की लम्बाई 140 मीटर है। इनका निर्माण कार्य प्रगति पर है।

इन सुरंगों के निर्माण में अत्याधुनिक सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। वर्तमान समय में सुरंग के अंदर जैसे इनवर्ट सफाई, पीसीसी, नोफाइन कांक्रीट, 315 मिमी व्यास वाले सेंट्रल ड्रेन, 160 मिमी व्यास के साइड ड्रेन एवं निचले हिस्से में आरसीसी आदि के उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री से निर्माण कार्य किए जा रहे हैं।

मंडल रेल प्रबंधक सौरभ बंदोपाध्याय ने बताया कि इन सभी सुरंगों का निर्माण बेहतर ढंग से किया जा रहा है। सबसे चुनौतीपूर्ण कार्य सुरंग-5 में 530 मीटर डबल ट्रैक का निर्माण किया गया है। जिसमें 500 मीटर वक्रीय कार्य और 14.4 मीटर चौड़ाई का कार्य बिना किसी चूक के पूरा करने में सफलता मिली है। सुरंग 4 एवं 5 जहां से गुजरती हैं, वहां एक वन्यजीव अभयारण्य स्थित है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण के नियमों का पूरा पालन किया गया है। मंडल रेल प्रबंधक ने बताया कि वन्यजीव संरक्षण के लिए लाइन पर पांच ओवरपास, 20 अंडरपास, वन्य जीवों को पानी उपलब्ध कराने के लिए छह डैम का निर्माण किया जा रहा है। एक जल भंडार है, जिस पर सौर ऊर्जा से बोरवेल चालू कर दिया गया है। ये सुरंगें बाघ, तेंदुए समेत सभी वन्यप्राणियों के जीवन को आसान बनाएंगी। इनके लिए पटरी से गुजरे बगैर आवागमन करना आसान होगा।

Posted By: Ravindra Soni

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