भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। केंद्रीय आयुष मंत्रालय और नेशनल कमीशन फार इंडियन सिस्टम आफ मेडिसिन की सहमति पर आयुर्वेद, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथिक डाक्टर्स 21 तरह के कोविड-19 केयर कोर्स करने के बाद केंद्रीय आयुष मंत्रालय व राज्य सरकार की गाइडलाइन के अनुसार कोरोना मरीजों का अपनी चिकित्‍सा पद्धति में इलाज कर सकेंगे। इसके तहत वह वह जरूरी औषधियां भी दे सकेंगे। साथ ही पोस्ट कोविड मरीजों की विधिवत देखरेख हेतु मरीजों का व उनके परिजनों का मार्गदर्शन भी करेंगे।

आयुष मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डा. राकेश पांडेय ने बताया कि आयुर्वेद के द्वारा कोविड का क्लीनिकल मैनेजमेंट, कोविड-19 के साथ हाइपरटेंशन डायबिटीज का इलाज, नेचुरोपैथी, यूनानी के जरिए कोरोना का इलाज, हाई रिस्क वाले मरीजों का कोरोना का इलाज, कोरोना के हॉस्पिटलाइज मरीजों के लिए मुख की देखभाल आदि कोर्स शामिल हैं। लंबे अरसे से केंद्रीय आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा व एनसीआईएसएम के अधिकारी इसके लिए प्रयासरत थे कि आयुर्वेद व आयुष पद्धति को चिकित्सा की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। मध्य प्रदेश समेत देशभर में 10 लाख से ज्यादा पंजीकृत आयुष डॉक्टर्स हैं, जो इन कोर्सेस को कर सकेंगे।

डॉ राकेश पांडेय ने कहा कि कोरोना काल में आयुर्वेद-आयुष औषधियां जनमानस का जीवन बचाने में मददगार रही हैं। केंद्रीय आयुष मंत्रालय, मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन एवं एनसीआइएसएम का यह सराहनीय कदम है।

Posted By: Ravindra Soni

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