- 28 दिन की निगरानी के बाद खतरे से किया बाहर

- 17 नए लोगों के साथ 199 की अभी भी निगरानी जारी

- वर्तमान स्थिति में कोरोना का कोई भी संदिग्ध प्रदेश के अस्पताल में भर्ती नहीं

भोपाल। नवदुनिया प्रतिनिधि

28 दिन तक निगरानी रखने के बाद चीन से लौटे कोरोना के 19 संदिग्ध लोगों को खतरे से बाहर कर दिया है। इनकी निगरानी बंद कर दी है। इनमें से 15 लोगों को शुक्रवार एक दिन के भीतर खतरे से बाहर मानते हुए निगरानी बंद की गई है। चार लोगों की निगरानी पूर्व में ही बंद की जा चुकी थी। वहीं शुक्रवार को ही चीन से पूर्व में यात्रा करके लौटे 17 नए लोगों की निगरानी शुरू कर दी है। इस तरह मप्र में कुल 199 लोगों की निगरानी वर्तमान स्थिति में जा रही है। राहत की बात यह है कि पिछले एक हफ्ते में प्रदेश में कोई भी संदिग्ध नहीं मिला है। अभी तक प्रदेश से 17 लोगों के सैंपल भेजे गए थे। इनमें 12 की रिपोर्ट आ चुकी है। सभी निगेटिव हैं। 5 की रिपोर्ट आनी बाकी है लेकिन इनकी भी हालत खतरे से बाहर है। बता दें कि अभी तक निगरानी में रखे गए या रखे जा रहे लोगों में से ज्यादातर छात्र हैं जो चीन के किसी ने किसी शहर में रहकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इसके बाद ज्यादातर वे लोग हैं जो व्यापार से जुड़े हुए हैं।

स्वास्थ विभाग के अफसरों ने बताया कि चीन की यात्रा कर लौटे लोगों को 28 दिन तक निगरानी में रखने के निर्देश भारत सरकार की गाइड लाइन में है। निगरानी में ऐसे लोगों को रखा जाता है जो चीन में कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने के 14 दिन पहले से लेकर अब तक चीन की यात्रा पर गए थे। अभी जो लोग निगरानी पर है उन्हें घर में ही अलग से रहने के लिए कहा गया है। संबंधित जिलों की स्वास्थ विभाग की टीम उनसे लगातार संपर्क में है। किसी भी तरह के लक्षण दिखने पर उन्हें तुरंत अस्पताल में सूचना देने के लिए कहा है। इस संबंध में उनसे एक घोषणापत्र भी भरवाया है। 13 लोग फिर से चीन लौट गए हैं।

हफ्ते भर से नहीं आई जांच रिपोर्ट

कोरोना वायरस की जांच के लिए अभी तक प्रदेश से 17 संदिग्धों के सैंपल लेकर जांच के लिए एनआईवी पुणे भेजे हैं। इनमें 12 की रिपोर्ट आ चुकी है। बाकी पांच की रिपोर्ट हफ्ते भर से अटकी है। बताया जा रहा है कि एनआईवी पुणे में देशभर से आने वाले सैंपलओं की संख्या ज्यादा होने की वजह से जांच में देरी हो रही है। सीएमएचओ भोपाल डॉ. सुधीर डेहरिया का कहना है कि गर्मी बढ़ने के बाद कोरोना का खतरा कम होता जा रहा है।

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