रुमनी घोष, भोपाल। तय तारीख से लगभग एक महीना बीत चुका है, लेकिन इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, श्योपुर, शिवपुरकलां सहित प्रदेश के 35 फीसद इलाकों में मानसून नहीं पहुंच पाया है। प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में जहां मानसून पहुंचा है, वहां सक्रिय नहीं होने से बोवनी अटकी है। 16 जुलाई तक मानसून सक्रिय नहीं हुआ तो सोयाबीन की फसलों और इससे जुड़े इंदौर-उज्जैन संभाग सहित प्रदेश के 50 लाख किसानों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।

इंदौर स्थित सोया अनुसंधान केंद्र के निदेशक एसके श्रीवास्तव ने दो तारीख 10 और 16 जुलाई की घोषणा की है। वे कहते हैं कि यदि 10 जुलाई तक मानसून नहीं आया तो किसानों को नुकसान की भरपाई के लिए 25 फीसद अतिरिक्त बीज बोना पड़ेगा। और यदि 16 तक भी मानसून नहीं आया तो उत्पादन प्रभावित होगा। उधर, मौसम विभाग आगाह कर रहा है कि 16 तक मानसून नहीं आए तो जिन किसानों के पास सिंचाई के साधन नहीं है वे सोयाबीन के बजाय कम अवधि और कम पानी वाली फसल के बीज बोएं। हालांकि इतने बड़े पैमाने पर यह बदलाव संभव नहीं है। ऐसे में सभी की आस 16 जुलाई पर टिकी है।

प्रदेश में मुख्य रूप से भले ही 11 तरह की खरीफ की फसलें हैं और लगभग 66 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बोवनी का लक्ष्य है, लेकिन अभी तक सिर्फ सवा तीन लाख हेक्टेयर में ही बोवनी हो पाई है। इसमें से इंदौर-उज्जैन संभाग में तो बोवनी शुरू ही नहीं हो पाई है, जबकि पूरे प्रदेश का आधा उत्पादन इन दोनों संभाग से होता है। दोनों संभाग के प्रभारी संयुक्त संचालक आरके त्रिपाठी के अनुसार उज्जैन में लगभग 18-20 लाख हेक्टेयर और इंदौर में 9 लाख हेक्टेयर का रकबा है। इस साल दोनों जगह अभी तक बोवनी शुरू ही नहीं हो पाई। हालांकि उम्मीद है कि मालवा-निमाड़ में 16 जुलाई से पहले मानसून सक्रिय हो जाएगा।

80 से 90 दिन की फसल

उज्जैन जिले के उपसंचालक अवधेश नेमा के अनुसार यहां इस क्षेत्र में लगभग 98 फीसद किसान सोयाबीन पर निर्भर हैं। 80-90 दिन की अवधि में फसल देने वाली सोयाबीन की किस्म 95-60 ही सबसे ज्यादा प्रचलित है। चर्चा है कि कुछ किसान निजी तौर पर कम अवधि वाले बीज लेकर आए हैं, लेकिन बाजार में यह बड़े पैमाने पर उपलब्ध नहीं है।

अर्थव्यवस्था पर 10 फीसद असर डालेगा

प्रदेश में सोयाबीन का उत्पादन सालाना लगभग 60 लाख टन है। जो देशभर में होने वाले उत्पादन का लगभग 55-66 फीसद है। सोपा के प्रवक्ता राजेश अग्रवाल के अनुसार सोयाबीन की फसलों से लगभग 50 लाख किसाने जुड़े हैं और 20-25 हजार करोड़ का कारोबार होता है। यदि फसल प्रभावित हुई तो प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से बाजार पर 10 फीसद असर डालेगा।

खेतों से ..... किसानों पर दोहरी मार

पिछली बार की ज्यादा बारिश को देखते हुए हमने लेट वेराइटी वाले बीज संरक्षित किए, लेकिन इस बार फिर मौसम की बेरूखी की वजह से लेट वेराइटी की सीड को छोड़कर अर्ली वैराटीय के बीज मुंह मांगे दाम में खरीदना पड़ रहा है। यहां तक कि सरकार की सेवा सहकारी संस्थाएं भी किसानों को बाजार दर से ही 6600 रुपए प्रति क्विंटल बीज दे रही है। और बीज की गारंटी भी नहीं दे रही है।

-अश्विनी सिंह, ग्राम पिपल्याहामा (उज्जैन) के किसान, (सर्वाधिक उप्तादकर्ता किसान अवार्ड विजेता, मेढ़ एवं नाली पद्धति से टपक सिंचाई के द्वारा सोयाबीन और गेहूं उत्पादन करने वाले किसान )

नुकसान तो हो चुका

मानसून में अब तक जो देरी हुई है, उससे नौ फीसद नुकसान तो हो चुका। मानसून और जितना लेट होगा उतना किसानों पर भार पड़ेगा।

-प्रमोद शुक्ला, खंडवा के किसान

यह सही है कि अभी तक मानसून पूरी तरह से सक्रिय नहीं हुआ है। पर उम्मीद है कि 15 जुलाई तक अच्छी बारिश हो जाएगी। बोवनी के लिए किसानों के पास भी अभी वक्त है। लिहाजा किसी प्रकार की घबराहट जैसी स्थिति नहीं है। जिनके पास सिंचाई के साधन है वो बोवनी भी कर रहे हैं।

डॉ. राजेश राजोरा, पीएस, कृषि

मौसम विभाग: सिस्टम नहीं दिख रहा

मौसम विभाग के निदेशक अनुपम काश्यपी का कहना है प्रदेश के 35 फीसद क्षेत्र में अभी तक मानसून नहीं पहुंचा है। बंगाल की खाड़ी में सिस्टम बनने की संभावना है, जिससे 13 से 17 जुलाई तक प्रदेश में अच्छी बारिश हो सकती है।

चेतावनी: ...तो सोयाबीन की जगह मूंग, उड़द बोएं

- जिन किसानों के पास 2-3 बार सिंचाई के साधन है, वे ही जल्दी उत्पादन देने वाली (80 दिन) सोयाबीन की फसलों की बुआई करें

- जिनके पास सिंचाई के साधन नहीं है वे किसान सोयाबीन की जगह कम पानी में उत्पादन देने वाली मूंग, उड़द, तिल की बुआई करें।

(मौसम विभाग द्वारा जारी बुलेटिन में निदेशक द्वारा दी जा रही है सलाह)

प्रदेशभर में खरीफ के फसलों की बोवनी की स्थिति

फसल-लक्ष्य-बोवनी-गत वर्ष बोनी

सोयाबीन-66.0-0.91-37.09

कपास- 6.50-1.21-4.64

मक्का-11.0-1.63-5.91

अरहर-5.50-0.07-0.77

उड़द-7.00-0.13-1.61

मूंग-1.25-0.02-0.31

मूंगफली-2.25-0.13-1.25

धान-20.0-1.32-1.60

कुल्थी एवं अन्य-0.20-0.0-0.04

कुल-130.20-5.49-54.84

(आंकड़े लाख हेक्टेयर में, स्रोत: कृषि विभाग द्वारा जारी 30 जून 2014 तक की जानकारी)

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