कलेक्टर तरुण पिथोड़े ने 4 सितंबर 2019 को धारा 144 के आदेश जारी किया था। इस आदेश के अनुसार विसर्जन घाटों के लिए 11 बिंदुओं पर प्रतिबंध लगाया गया था। इन 11 बिंदुओं का पालन किया जाता तो यह हादसा नहीं होता।

यह थे आदेश के प्रमुख बिंदु

- झील में चलने वाली समस्त बोटें झील में चालने के पूर्व बोट की मजबूती एवं बोट के झील में चलाने योग्य होने संबंधी प्रमाण साथ में रखेंगे।

- मप्र टूरिज्म एवं डवलपमेंट कार्पोरेशन के संबंधित कर्मचारियों द्वारा बोट की झीलों में चलाने योग्य होने संबंधी जांच कर प्रमाणित किया जाएगा।

- प्रत्येक बोट में लाईफ जैकेट उतनी संख्या में रखे जावेंगे जितनी संख्या में बोट यात्रियों को ले जाने के लिए प्रमाणित है।

- प्रत्येक बोट की अधिकतम यात्री के बारे में मप्र टूरिज्म एवं डवलपमेंट कार्पोरेशन द्वारा प्रमाणित किया जाएगा।

- प्रत्येक बोट में सेफ्टी ट्यूब भी पर्याप्त संख्या में रखे जाएंगे।

- बोट में अनिवार्य रूप से कुशल तैराक होना चाहिए। बोट चालक अपने नाम की पट्टिका लगाकर रखनी होगी।

- प्रति माह माह बोट का तकनीकी सत्यापन करवाना अनिवार्य होगा, जिससे किसी प्रकार की खराबी का तत्काल पता लग सके।

- बोट में यात्रियों के बैठने के पहले उन्हें लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य होगा।

- सूर्यास्त होने या सायंकाल 7 बजे तक जो भी पहले हो इसके बाद बोट का संचालन नहीं होगा।

- किसी भी यात्री अथवा बोट चालक का नशे की हालत में नहीं होना चाहिए।

घटना से सबकः बनाया जाएगा जल जीवन रक्षक दल

इधर कलेक्टर तरुण पिथोड़े ने बताया कि इस तरह की घटना दोबारा ना हो इसके लिए सभी तालाबों के लिए जल जीवन रक्षक दल बनाया जाएगा। इस दल को आधुनिक संसाधन देने के लिए प्लानिंग की जाएगी। वहीं शहर में अब मूर्तियों की ऊंचाई भी निर्धारित की जाएगी ताकि बेहतर तैयारी की जा सके। उन्होंने बताया कि 14 सितंबर को दोपहर साढ़े 12 बजे इसके लिए अधिकारियों व विसर्जन घाट समितियों के अध्यक्ष की बैठक बुलाई गई है।