दीपक विश्वकर्मा, भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी जमीनों (Madhya Pradesh Government Land) के रिकॉर्ड में एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। राजस्व विभाग के हाल ही में जारी किए गए एक पत्र से यह सामने आया है कि प्रदेश में 42 लाख हेक्टेयर व भोपाल में 65 हजार हेक्टेयर जमीन सरकारी रिकॉर्ड से गायब(Land Record Missing) हो गई है। अब सवाल यह उठता है कि अधिकारियों ने बड़ी रकम लेकर यह जमीन कहीं भू-माफियाओं (Land Mafia Madhya Pradesh) के हवाले तो नहीं कर दी? हालांकि, अब इस बात का अभियान चलाकर पता लगाया जा रहा है। इसके लिए सभी जिला कलेक्टरों को पत्र भी लिखा गया है। वहीं कलेक्टरों ने अपने जिले के सभी तहसीलदारों को पत्र लिखकर 10 दिन के अंदर गायब हुए जमीन के रिकॉर्ड का पता लगाने का आदेश दिया है। यह पूरी जमीन सन 1980 से 2000 के बीच सरकारी रिकॉर्ड से गायब हुई है।

शहडोल में सबसे ज्यादा जमीन गायब : सबसे ज्यादा जमीन शहडोल, सीधी, शिवपुरी, बालाघाट और छिंदवाड़ा की गायब हुई है। यहां पांच लाख हेक्टेयर से लेकर दो लाख हेक्टेयर तक जमीन का रिकार्ड 1980 से 2000 के बीच का नहीं मिल पा रहा है। शहडोल में 1980 के पहले 13 लाख 55 हजार 066 हेक्टेयर जमीन सरकारी थी। जो वर्ष 2000 में 6 लाख 44 हजार 964 हेक्टेयर ही रह गई है। इस तरह 20 साल में 5 लाख 41 हजार 042 हेक्टेयर जमीन का रिकार्ड नहीं मिल पा रहा है। इसी तरह इंदौर, होशंगाबाद और विदिशा में रिकार्ड ठीक है। सागर में 407, उज्जैन में 663 व देवास में 985 हेक्टेयर जमीन का रिकार्ड नहीं मिल पा रहा है।

यह उठ रहे हैं सवाल

- मौके पर जमीन निजी तो नहीं हो गई?

- रिकार्ड से जमीन किसने गायब की?

- राजस्व रिकार्ड से इन जमीनों के गायब होने की मुख्य वजह क्या है?

- किसे लाभ या किसे नुकसान पहुंचाने के लिए यह जमीन गायब की है?

कुछ मसले सुलझाए जा रहे हैं वन विभाग की कुछ जमीनें है जो उनके वर्किंग प्लान में शामिल हो जाती है। दोनों विभाग मिलकर रिकॉर्ड अपडेट कर रहे हैं। जमीन गायब नहीं हुई है रिकॉर्ड खंगलवाया जा रहा है। - मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव, राजस्व

Posted By: Nai Dunia News Network