भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। एक तो भीषण गैस त्रादसी का दंश, ऊपर से कोरोना का कहर। भोपाल में कोरोना से अब तक 1003 मरीजों की मौत हुई है। इनमें 467 यानी 47 फीसद गैस पीड़ित मरीज थे। मरने वालों में 443 की उम्र 40 से ऊपर थी, यानी वह गैस से सीधे तौर पर प्रभावित हुए थे। इस संदर्भ में हमीदिया अस्पताल के छाती व श्वास रोग विशेषज्ञ डा. लोकेन्द्र दवे ने कहा कि गैस पीड़ितों के फेफड़े कमजोर होने की बात सामने आ चुकी है। उन्हें फेफड़ें संबंधी बीमारियां हैं। कोरोना भी फेफड़े पर असर करता है। इस कारण आशंका है कि गैस पीड़ितों के कोरोना की चपेट में आने के बाद उनकी हालत ज्यादा बिगड़ी होगी।

गैस पीड़ितों के लिए काम करने वाले संगठन भोपाल ग्रुप फार इन्फारेमशन एंड एक्शन की संयोजक रचना ढींगरा ने कोरोना से मरने वाले लोगों की जब पड़ताल की तो यह आंकड़ा सामने आया है। मृतकों में 316 पुरुष और 151 महिलाएं हैं। इनके पास गैस पीड़ित होने का कार्ड भी था। शासन के रिकार्ड के अनुसार भोपाल में पौने छह लाख लोग गैस पीड़ित हैं। इस तरह शहर की कुल आबादी 28 लाख के मान से गैस पीड़ित 17 फीसद ही हैं, लेकिन कोरोना से मौत के मामले में उनका आंकड़ा 47 फीसद है। इसका मतलब यह कि संक्रमित होने वालों में भले गैस पीड़ितों का आंकड़ा कुछ भी रहा हो, लेकिन उन पर बीमारी का असर ज्यादा रहा, जो उनकी मौत की वजह बना।

यह भी रही लापरवाही

कुछ गैस पीड़ितों को पहले से ही कई बीमारियां हैं। ऐसे में कोरोना से संक्रमित होने पर उनके इलाज की विशेष व्यवस्था की जानी थी, लेकिन गैस पीड़ितों के लिए बनाए गए सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल में भी उन्हें भर्ती नहीं किया गया। अप्रैल, मई में जब कोरोना के बहुत मरीज मिल रहे थे तो कुछ गैस पीड़ितों को अस्‍पताल में बिस्तर तक नहीं मिल पाया था।

Posted By: Ravindra Soni

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