भोपाल। बचत की राशि से ज्यादा लाभ कमाने की हसरत रखने वाले लोगों से क्रिप्टो करेंसी (आभासी मुद्रा) के माध्यम से करोड़ों की धोखाधड़ी करने वाले एक गिरोह का मध्य प्रदेश पुलिस की एसटीएफ ने पर्दाफाश किया है। क्रिप्टो करेंसी किसी भी देश की अधिकृत मुद्रा नहीं है लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में अवैध रूप से यह प्रचलन में है। गिरोह के सरगना जबलपुर के रैकवार दंपती और उसके साथी रूपेश राय ने देश व विदेश के 100 से ज्यादा लोगों से 50 से लेकर 100 करोड़ रुपए ठगे हैं। गिरफ्तार दंपती के बैंक ट्रांजेक्शन में करीब चार करोड़ की प्रविष्टियां मिली हैं।

बताया जाता है कि जबलपुर की दंपती ब्रजेश रैकवार और सीमा रैकवार तथा रूपेश राय ने क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से लोगों से निवेश लेने की शुरुआत की। राजीव शर्मा नामक व्यक्ति निवेश के लिए आने वालों को बताया करता था कि मल्टीलेबल मार्केटिंग बिजनेस है और इसके प्रमोटर ब्रजेश व रूपेश राय हैं।

राजीव के अलावा रूपेंद्र पाल सिंह, विनीत यादव एसोसिएट्स व पार्टनर हैं। इन लोगों ने हांगकांग के केविन और मलेशिया के डेनियल फ्रांसिस को भी अपने साथ जोड़ा। इसका नेटवर्क चीन और दुबई तक फैला है। हांगकांग की एक कंपनी जो, सी सेक्स एक्सचेंज में पंजीकृत थी, उसके द्वारा निवेशकों को लुभाया।

इन लोगों ने निवेशकों को लाने के लिए मुंबई, दिल्ली, चंडीगढ़, भोपाल, रायपुर, जालंधर, अमृतसर जैसे शहरों में मीटिंग कीं। मगर 2017-18 में आभास मुद्रा की कीमतें तेजी से गिरीं तो यह कारोबार भी प्रभावित हुआ। दिसंबर 2017 में सी सेक्स एक्सचेंज बंद हो गया तो ब्रजेश-रूपेश और उनके साथियों ने पीजीयूसी (प्लस गोल्ड यूनियन क्वाइन) शुरू किया जिसका जयपुर में सर्वर रखा। वहां से कारोबार चलाया। गिरोह के सरगना जबलपुर के रैकवार पति-पत्नी को गिरफ्तार कर लिया गया है। साथी रूपेश राय फरार है।

100 से ज्यादा पीड़ितों की पहचान

ब्रजेश व रूपेश ने क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से निवेश के लिए लोगों को प्रलोभन दिया। तीन लाख से लेकर 14-15 लाख रुपए तक लोगों ने ब्रजेश व रूपेश के माध्यम से निवेश किए। निवेशक को वे चैन बनाने का लालच देते और नए निवेशक लाने पर उस राशि में से ही हिस्सा देते थे।

मप्र पुलिस के एसटीएफ प्रमुख पुरुषोत्तम शर्मा और एडीजी अशोक अवस्थी ने मंगलवार को पत्रकार वार्ता में बताया कि देश-विदेश में सैकड़ों लोगों से धोखाधड़ी की जांच के लिए एसपी एसटीएफ राजेश सिंह भदौरिया के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया।

अवस्थी ने बताया कि क्रिप्टो करेंसी और बिटकॉइन वर्चुअल करेंसी हैं जो 2015 के लगभग चलन में आई थी। मगर ये अवैध करेंसी मानी जाती है। शर्मा ने बताया कि नवंबर 2018 में इसे प्रतिबंधित कर दिया गया था। गिरोह के झांसे में फंसे करीब 100 लोगों की पहचान हुई। इनमें मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के साथ देश के कई हिस्सों और विदेशी भी शामिल हैं।

फिल्म-कसीनों में निवेश

निवेशकों से मिलने वाली राशि को गिरोह के लोग फिल्म निर्माण और गोवा में कसीनों में निवेश करते थे। एपी-3 मॉशन पिक्चर्स प्रोडक्शन में महफिल ए उमराव जान के लिए निवेश किया। यही नहीं जमीन, मकान, दुकान, मुजरा-नाइट, बॉलीवुड हाइट्स के साथ ही हांगकांग, दुबई, थाईलैंड, मलेशिया, चीन, सिंगापुर आदि देशों में मौज मस्ती की और निवेश किया।

Posted By: Hemant Upadhyay