Sawan Month 2020 : भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। शहर के शिवालयों में सबसे प्रसिद्ध शिव मंदिर श्री बड़वाले महादेव मंदिर की महिमा ऐसी है कि दूर-दूर से लोग उनके दर्शनों के लिए आते हैं। इस धार्मिक स्थल से पौराणिक मान्यता जुड़ी है। इस मंदिर से जुड़े कई चमत्कार श्रद्धालुओं की आस्था को मजबूत बनाते हैं। किवंदती है कि जिस स्थल पर बाबा बटेश्वर विराजमान हैं, वे इसी पेड़ की जड़ से प्रगट हुए थे। मंदिर का करीब 200 साल पूर्व का इतिहास बताया जाता है। तब का लगा बड़ का पेड़ आज भी अपने महत्व की गाथा गाता है। ऐसा माना जाता है कि बिना जटाओं का बड़ नहीं होता है, लेकिन इस मंदिर में एक ऐसा वटवृक्ष है, जिसमें जटाएं नहीं हैं। वहीं दूसरी ओर एक पीपल का वृक्ष भी है, जिसकी बड़ी-बड़ी जटाएं हैं।

कभी बगीचा हुआ करता था, आज शिवजी का प्रसिद्ध स्थल

श्री बड़वाले महादेव मंदिर समिति के सदस्य प्रमोद नेमा व प्रकाश मालवीय ने बताया कि इस धार्मिक स्थल के स्थान पर बगीचा हुआ करता था। इसमें कई प्रजातियों के वृक्ष लगे थे। एक समय की बात है जब एक राहगीर इसी बगीचा में धूप का समय बिताने के लिए आराम करने लगा। थकान के चलते नींद लग गई, लेकिन करवट लेते समय बड़ की जड़ में स्थित एक सिला से सिर टकराया। उसे देखने पर उसमें शिवलिंग के दर्शन हुए। इसके बाद पेड़ के आसपास खुदाई करवाई गई। 36 फीट नीचे खुदाई के बाद भी छोर नहीं मिला। खाई में पानी भर गया। इसके बाद राहगीर ने पेड़ की जड़ में स्वयंभू शिवलिंग की बटेश्वर महादेव के रूप में पूजा-अर्चना की। तभी से यहां पूजा-अर्चना की जा रही है। 35 वर्ष पूर्व मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया। पिछले तीन दशकों से महाशिवरात्रि के पर्व पर शिव बारात का आयोजन होता है, जिसमें शहर के सभी वरिष्ठजन शामिल होते हैं। सभी प्रदोष व्रत पर विशेष श्रृंगार भी होता है।

50 साल से कर रहे बाबा के दर्शन

नूरमहल इमापबाड़ा निवासी मनमोहन भारद्वाज (70 वर्ष) बताते हैं कि पिछले 50 वर्षों से मंदिर से हमारी श्रद्धा-आस्था जुड़ी है। तभी से निरंतर रूप से बाबा की पूजा-अर्चना के लिए आ रहे हैं। बाबा की यही कृपा हम पर बनी हुई है। वहीं चालीस काजीपुरा प्रहलाद दास मंगल (72 वर्ष) ने बताया कि पिछले 5-6 दशक पूर्व इस स्थान पर कच्चा मंदिर ही था। आज सभी के सहयोग भव्य मंदिर के रूप में प्रसिद्ध स्थल बन गया है। बाबा की महिमा ऐसी है कि हर पर्व, तिथि में नियमित रूप से मंदिर जाते हैं।

मंदिर से जुड़े चमत्कार

- मंदिर का 200 साल से अधिक पुराना इतिहास।

- बड़ की जड़ से प्रगट हुए बाबा बटेश्वर।

- 36 फीट खुदाई के बाद भी शिला का नहीं मिला छोर।

- मंदिर में बिना जटाओं वाला वट्वृक्ष।

- पीपल के पेड़ में बड़ी जटाएं हैं।

- वर्षों पुराने कुआं के पानी से कई लोगों का चर्म रोग ठीक हुआ।

- इस कुआं का जल स्तर भीषण गर्मी में भी कम नहीं होता।

Posted By: Nai Dunia News Network

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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